आंचल
आंचल
माँ का आंचल कितने कामों में आता है,
आज इनके अनगिनत लाभ में गिनवाता हूँ,
छोटे बच्चे का मुंह वो
अपने आंचल से पोछ लेती है,
जुकाम से बहती नाक
आंचल से साफ करती है,
आंचल का सहारा
बचपन से बुढ़ापे तक मिलता है,
धूप में चलते समय मेरे सर को
आंचल से ढक लेती है,
बरसात की नन्ही नन्ही बूंदें मुझे ना छुए,
इसलिए वो आंचल से छुपा लेती है,
कभी रसोई में डिब्बे को
साफ करती हुई नजर आती है,
कभी अपनी भीगी आंसू को
आंचल से छिपाती नजर आती है,
माँ का आंचल जब लहराता,
अनगिनत काम कर जाता है,
भगवान की पूजा में सर ढकने के लिए,
प्रसाद के लिए ,
गोद भरने के लिए,
और ना जाने क्या-क्या करने के लिए,
माँ का आंचल जब लहराता,
अनगिनत काम करने के लिए,
कभी दिखती गर्म बर्तन को उठाते हुए ,
कभी अपने आंचल से सिर सहलाते हुए,
तेरा आंचल नर्म एहसास दिलाता है,
माँ का आंचल कई काम कर जाता है,
माँ का आंचल जिसमें ,
संस्कारों की छवि दिखती है,
माँ अपने आंचल से पूरे परिवार का ख्याल रखती है,
ना थकती ना रुकती चलती ही जाती है,
आंचल के सहारे हर काम कर जाती है,
कभी पैसों को अपने आंचल में गांठ बांध लेती है,
अपने बच्चों को हमेशा दुआ देती है,
अपनों को हर मुसीबत से बचा लेती है,
सोलह सिंगार किए बिना ,
आंचल से खुद को सजा लेती है।।
