Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!
Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!

डा.अंजु लता सिंह 'प्रियम'

Children

4  

डा.अंजु लता सिंह 'प्रियम'

Children

"आम का मौसम"

"आम का मौसम"

1 min
292



बौर आ गए आम्र तरु पर-

कोयलिया कुहू कुहू कुहुकी,

स्वाद अनूठे लेकर आई-

हरी-भरी बगिया महकी.


बचपन में देखे थे हमने-

हरे बाग आम के खूब,

गुच्छों में लटके रहते थे-

हमें लुभाते थे अपरूप.


बैलगाड़ी रुकवा कर बाबा-

बाग की सैर कराते थे,

खट्टी अमियां चुन-चुन कर वे-

हमको बहुत खिलाते थे.


आंगन में सूखा करती थी- 

कच्चे आमों की फांकें,

बना खटाई अमचूरी हा!

दादी सबको थीं बांटें.


पक्के आम रसीले पीले-

मीठे मधुर स्वाद वाले,

सिंदूरी शरबती दशहरी-

और लंगड़े सब मतवाले.


आम का नाम लुभाए सबको- 

फलों का है सचमुच राजा,

आम की फितरत मुझसे कहती- 

आजा तू मुझको खाजा.


गूदा, गुठली सब भाते हैं-

होते भाग्यवान के नाम,

सारे जग में लोकप्रिय हैं-

स्वाद से भरे हुए तमाम,

 

खट्टा मीठा पापड़ हो या- 

आम पना शेक, कैंडी,

पूजा हवन भी रहे अधूरा-

मिले न गर पात-डंडी.


हिंदी की अक्षरमाला से

जुड़े हुए हैं इसके तार

ऐसे मधुर रसीले फल को

नमन करूं मैं बारंबार

  _____



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Children