डा.अंजु लता सिंह 'प्रियम'
Inspirational
मेरी कविता गाँव का प्यारा शब्द चित्र खिंचती है
"हिंदी सी तुम...
आओ सब हिंदी म...
मेरे प्यारे ...
खुद की पहचान
सफर सुहाना
ओ मेघा कारे
"आम का मौसम"
सपनों की उड़ा...
धरती मां
अमृत महोत्सव
सब में नई चेतना नई जागृति जगाएँ हम सब में नई चेतना नई जागृति जगाएँ हम
यह जीवन एक तमाशा है। यह जीवन एक तमाशा है।
जहां मूल्य है वहां व्यक्ति सभ्य बनेगा ........।। जहां मूल्य है वहां व्यक्ति सभ्य बनेगा ........।।
युद्ध में विजय पाने को, तत्पर हूं ना कि घुटने टेकने को, युद्ध में विजय पाने को, तत्पर हूं ना कि घुटने टेकने को,
कच्छप मैं नील समंदर में विशाल लहरियों से क्या भय. कच्छप मैं नील समंदर में विशाल लहरियों से क्या भय.
तुम्हे देखे बिन हम जिए कैसे तेरी मुस्कुराहटों पे सजदे किये. तुम्हे देखे बिन हम जिए कैसे तेरी मुस्कुराहटों पे सजदे किये.
ओंकारेश्वर मंदिर के दर्शन के बाद आसपास के वातावरण पर यह कविता लिखी गई है। ओंकारेश्वर मंदिर के दर्शन के बाद आसपास के वातावरण पर यह कविता लिखी गई है।
क्योंकि जो आज है वह क्या पता कल हो ना हो ? इसलिए मुस्कुराओ बिन बात ही तुम यह पल हो क्योंकि जो आज है वह क्या पता कल हो ना हो ? इसलिए मुस्कुराओ बिन बात ही तुम...
इसीलिए, हे बूढ़े दरख्त, वक़्त रहते हो जाओ सख्त। इसीलिए, हे बूढ़े दरख्त, वक़्त रहते हो जाओ सख्त।
डरावना शब्द मन में भय पैदा कर देता है, बचपन में हम डरावनी किताबें पढ़ा करते थे। डरावना शब्द मन में भय पैदा कर देता है, बचपन में हम डरावनी किताबें पढ़ा कर...
तू शांतिप्रिय, इस झील किनारे रहता है ध्यान लगाए तू शांतिप्रिय, इस झील किनारे रहता है ध्यान लगाए
भूल जाएगा इंसान जब मिथ्या अहम, भूल जाएगा इंसान जब मिथ्या अहम,
आज फिर से कलम मेरी निर्झर शब्दलहर बहा चली। आज फिर से कलम मेरी निर्झर शब्दलहर बहा चली।
तू आसमान की उड़ान है तू खुद एक पहचान। तू आसमान की उड़ान है तू खुद एक पहचान।
मुझे नहीं मिलते वो शब्द, जिनसे मैं अपने प्रेम को व्यक्त कर सकूँ अपने पिता के प्रति। मुझे नहीं मिलते वो शब्द, जिनसे मैं अपने प्रेम को व्यक्त कर सकूँ अपने पिता के ...
मानव तन हे मिला अनमोल, तू व्यर्थ ना खोना इसका मोल। मानव तन हे मिला अनमोल, तू व्यर्थ ना खोना इसका मोल।
मई को कहते बैसाख -ज्येष्ठ जून की कहते ज्येष्ठ -आषाढ़ मई को कहते बैसाख -ज्येष्ठ जून की कहते ज्येष्ठ -आषाढ़
बेहतर को इतना ही खोजो कि न खो दे बेहतरीन को हम। बेहतर को इतना ही खोजो कि न खो दे बेहतरीन को हम।
तन का तेज दो दिन का बसेरा, मन के मंजुल से हरदम ही सवेरा। तन का तेज दो दिन का बसेरा, मन के मंजुल से हरदम ही सवेरा।
आपका प्रयास निश्चित तौर पर सफल होगा, राजेश छेत्री जी। आपका प्रयास निश्चित तौर पर सफल होगा, राजेश छेत्री जी।