STORYMIRROR

बेज़ुबानशायर 143

Tragedy

4  

बेज़ुबानशायर 143

Tragedy

'' आम आदमी है बेचारा ''

'' आम आदमी है बेचारा ''

1 min
315


राजनीति में सब बन गए नेता

वोट लेकर भूल गए जनता को

आम जनता को ना मिला सहारा

ठगा गया फिर से आम आदमी बेचारा ।


सेवा करने जो आए थे राजनीति में

वे राजा बन कर बैठ गए

जनहित के मुद्दों को भुलाकर

गड़े मुर्दे उखाड़ने लग गए     


 दोनों हाथों से देश लूट कर 

 नेताओं ने अपना भविष्य संवारा

आम जनता को ना मिला सहारा

ठगा गया फिर से आम आदमी बेचारा ।


नैतिकता को भुला दिया गया है

घोटालों पर घोटाले हो रहे हैं

अपनों को बचाने के लिए

ना जाने क्या-क्या जतन हो रहे हैं


दिन पर दिन बढ़ती महंगाई से

आम आदमी कैसे करें गुजारा

आम जनता को ना मिला सहारा

ठगा गया फिर से आम आदमी बेचारा ।


मुफ्त की बिजली पानी का वादा कर

नेता जनता से वोट पा जाएं

जिनको कुर्सी पर बिठाया जनता ने

वही नेता लुटेरे बन देश में लूट मचाएं

   

तरह-तरह की चालें चलकर नेता

भरता जाए काले धन से तिजोरी अलमीरा

आम जनता को ना मिला सहारा

ठगा गया फिर से आम आदमी बेचारा।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy