आखिरी इच्छा
आखिरी इच्छा
कल मैंने अपनी इच्छाओं का
ही श्राद्ध कर डाला
चढ़ा के उसको आखिरी सफर पर
खुद को मुक्त कर डाला
अब सारे तनाव सारी समस्याओं को
श्मशान में जला आता हूँ
श्राद्ध के महीने में श्राद्ध कर
आता हूँ
पर ना जाने कहाँ से एक इच्छा
अधूरी ही रहती हैं
उसका नष्ट ना कर पाना मजबूरी
सी रहती है
और वो इच्छा हो तुम सिर्फ तुम
बेचैन रूह रहती है हरपल
कब मिलोगी कहती है हरपल
मेरी आखिरी इच्छा यही है
सिर्फ चाहिए तुम्हारा साथ
तुम बिन लगता है ऐसे जैसे
कोई नहीं है साथ
मेरी ख्वाहिश मेरी जरुरत
मेरी बंदगी हो तुम
कम शब्दों में समझो तो
मेरी जिंदगी हो तुम।

