STORYMIRROR

Pooja Kapoor Ahuja

Drama

4  

Pooja Kapoor Ahuja

Drama

आज़ादी

आज़ादी

1 min
259

आज़ादी के उन पन्नो में कुछ तो राज़ था

जो छिपा आज भी कहीं

वो बेअल्फ़ाज़ था

झंडा तो उसने भी लहराया था कहीं


शायद वो सबके सामने अपनी बात रख नहीं पाया था

घूमा तो वो भी था उन सुंसान गलियों में

जब गोला बारूद अंग्रेज़ो ने चलाया था

कोशिश तो उसने भी की थी

हमें आज़ादी दिलाने की

जब उस अंग्रेज़ी हुकूमत को धक्का उसने लगाया था


कितना प्यार करता था अपने देश से

ये किसी से कह नहीं पाया था

खोया तो उसने भी था अपने घरवालों को

रोया वो भी बहुत था ये आज़ादी पाने को

पर वो बेज़ुबाँ था ना साहब

शायद इसलिए अपना दर्द किसी से बाँट नहीं पाया था।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama