Shubhi Agarwal
Tragedy Inspirational
लोगो का है कहना
अब नारी है सही मायनों में आज़ाद
और कहने को तो, नारी ही पूजा
बाद में सब काम दूजा
लेकिन जब क़लम उठाने की है बारी आती
तब खेलते है, सब अपने तानों की पारी।
जिंदगी का खेल
जिंदगी की पहल...
हर कोई एक सा ...
जिम्मेदारियां
माँ शक्ति
क़लम की जुबा
स्त्री
स्त्री होना आ...
मोहब्बत
रंग भेद
कल की नहीं ख़बर , बस आज का अफसाना है। कल की नहीं ख़बर , बस आज का अफसाना है।
इन राहों पर लुटने वाला मेरा अपना तो है इन राहों पर लुटने वाला मेरा अपना तो है
मैं घुला हुआ झरता हूं वहां उस टीले से बस्ती की झरोखे पर वहां से बहाता हूं मैं मैं घुला हुआ झरता हूं वहां उस टीले से बस्ती की झरोखे पर वहां से बहाता हूं...
फसल अच्छी होती है फिर भी उसे उचित दाम नही मिल पाता है. फसल अच्छी होती है फिर भी उसे उचित दाम नही मिल पाता है.
ये कश और काश मे जो डंडे का फर्क है वो डंडा वही सिगरेट है। ये कश और काश मे जो डंडे का फर्क है वो डंडा वही सिगरेट है।
अब जाग जाओ मुल्क के आवाम सब तो नहीं तो तेरी आस्था के भगवान बेच देंगे।। अब जाग जाओ मुल्क के आवाम सब तो नहीं तो तेरी आस्था के भगवान बेच देंगे।।
छीन के हमसे हमारे सपनों की लड़ी बँधा दी पैरों में शादी की ये कड़ी। छीन के हमसे हमारे सपनों की लड़ी बँधा दी पैरों में शादी की ये कड़ी।
क्या करूँ इन यादों का कुछ हमें समझ नहीं आता, क्या करूँ इन यादों का कुछ हमें समझ नहीं आता,
साथ देने के लिए, जिंदगी भर का वो हाथ हमारे, मझधार में छोड़ देगी। साथ देने के लिए, जिंदगी भर का वो हाथ हमारे, मझधार में छोड़ देगी।
हसीन फूल देखकर, कर लेते हैं मुहब्बत। करके बदनाम कली को, हो जाते हैं रुखसत हसीन फूल देखकर, कर लेते हैं मुहब्बत। करके बदनाम कली को, हो जाते हैं रुखसत
हाँ जीने के लिये मुझे भी जैसे, प्यार व सम्मान कि ज़रूरत तो होगी, हाँ जीने के लिये मुझे भी जैसे, प्यार व सम्मान कि ज़रूरत तो होगी,
वो ही बनता रब की नजर में कोहिनूर है। जो सबके भलाई के लगाता नित फूल है।। वो ही बनता रब की नजर में कोहिनूर है। जो सबके भलाई के लगाता नित फूल है।।
कभी लगा जोर का ठोकर उसके ताकत से ही वह बल खाएगा I कभी लगा जोर का ठोकर उसके ताकत से ही वह बल खाएगा I
पर इश्क़ में हो गया दिल मेरा जाहिल सा है। पर इश्क़ में हो गया दिल मेरा जाहिल सा है।
माँ ने सिखाया था सबका आदर सम्मान करना सबको प्यार देना सबका मान रखना। माँ ने सिखाया था सबका आदर सम्मान करना सबको प्यार देना सबका मान रखना।
अभी तो रिश्ते निभाना मुझे आता नहीं, हाथों में कलम के बजाय झाड़ू थमा दिया अभी तो रिश्ते निभाना मुझे आता नहीं, हाथों में कलम के बजाय झाड़ू थमा दिया
उन तीनों को बचपन से ही मैंने औरों को कैसे देखना है मैं नहीं सीखा पायी उन तीनों को बचपन से ही मैंने औरों को कैसे देखना है मैं नहीं सीखा पायी
हाथ पीले कर दिए बापू ने, दामन किसी और का थाम लिया। हाथ पीले कर दिए बापू ने, दामन किसी और का थाम लिया।
2021 को दे दो विदाई, इसने सारी हँसी मिटाई। 2021 को दे दो विदाई, इसने सारी हँसी मिटाई।
पुरुष ने कभी द्रौपदी का चीर खिंचवाया तो कभी सतयुग में सीता को चुराया। पुरुष ने कभी द्रौपदी का चीर खिंचवाया तो कभी सतयुग में सीता को चुराया।