STORYMIRROR

भावना भट्ट

Children

3  

भावना भट्ट

Children

आज फिर...

आज फिर...

1 min
186

आज फिर मुझे बचपन याद आया 

वो निश्छल, चंचल मन याद आया


याद आई वो बचपन की नादान बातें

कितनी प्यारी थी वो हमारी शरारतें


मस्त थे अपनी मस्ती में, न जिम्मेदारियों का भार था

इस अंधाधुंध दौड़ में शामिल होने का न ही भूत सवार था


अपने अंदर के बचपने को कहीं छोड़कर आगे बढ़ गए

हम क्या थे और बड़े होते-होते क्या से क्या बन गए


आज पीछे मुड़कर देखा तो स्वयं का वजूद न नज़र आया

ख़्वाहिशों के पीछे भागते-भागते मैंने खुद में ही खुद को न पाया


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Children