STORYMIRROR

गुलशन खम्हारी प्रद्युम्न

Romance

2  

गुलशन खम्हारी प्रद्युम्न

Romance

आईना

आईना

1 min
112

मेरे चेहरे की परछाई हो तुम,

जैसे मुझमें ही समाई हो तुम..

दिन रात एक सा लगता है,

ये कैसा आईना दिखाई हो तुम~!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance