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Ashu Kapoor

Tragedy

4  

Ashu Kapoor

Tragedy

आई मिस माय सेल्फ

आई मिस माय सेल्फ

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   तेरे चक्रव्यूह में--- ऐसी फंसी हूं----

   ऐ जिंदगी--- कि, 

   खुद से ही--- ना ताल्लुक हो गई हूं मैं

   उठाते -उठाते तेरा बोझ

   कई वर्षों से---

   खुद से ही बेगानी हो गई हूं

   आईना देखूं---- तो-- सूरत अजनबी सी-

    नजर आती है,

    मेरे बदले वहां कोई और ही खड़ी

    नजर आती है

    खो गई हंसी कहीं,

    रुक गए आंसू कहीं,

    वह खिलखिलाना, ठहाके उड़ाना,

    शोर मचाना, दोस्तों संग कहकहे लगाना---

    उड़ा ले गया---वक्त--- दूर कहीं--

    वो स्वप्न सुहाने,

    अब खुद में खुद को ही ढूंढती फिरती हूं,

     पर पहले जैसी '" आशु"

      मिलती नहीं कहीं,

      मैं अपने आप को ही

      मिस करने लगी हूं!!

       लेक्चर, कॉपियां और परीक्षाएं

      बच्चों का शोर---- सब बे मायने से

      लगने लगे हैं-----

      व्यस्तता से भरी जिंदगी में भी

      कहीं खोने लगी हूं मैं---

      पहले जैसी--- रही ना सूरत

      सीरत भी अब कुछ बदलने लगी है---

       बेवजह के वसवसे---

       बे वजह के तनावों से---

       घिरने लगी हूं मैं----

       पहले जैसी" आशु"

       मिस करने लगी हूं मैं!!

       जवानी ने चुरा लिया---

        बचपन सुहाना,

        जवानी को लेने-- आ गया बुढ़ापा सयाना

       उम्र की पटरी पर

       चलती जीवन की रेल

       अब रूकने लगी है,

       खुद मैं खुद की तलाश

       भी अब थकने लगी है

       कुछ अजीब सी कैफियत से

        दो-चार हो रही हूं,

        मैं अपनी ही जिद॔गी से

         बेजार 

        हो रही हूँ, 

         वक्त की आंधी में---

        उड़ गए थे जो पल-छिन 

        मैं वापस उन्हीं को तलाशने लगी हूं

         मैं खुद को ही मिस करने लगी हूं!!!

        


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