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Manoj Kumar

Thriller Others

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Manoj Kumar

Thriller Others

आदत हो गई है

आदत हो गई है

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सफ़र में,

अकेले चलना..

अपनों से बातें करना

आदत हो गई है


चराग़ के नीचे बैठ के...

ग़म को रोशनी दिखाना

हर शख्स का हिसाब रखना

धूप से आँखें मिलाना...

आदत हो गई है


आँसुओं में,

इक तस्वीर देखना

कागज़ पे लहू उगाना...

उगा के उसके नाम पे बेच देना..

आदत हो गई है


अल्फाजों को चबाना..

उसको याद किए बिन...

न सोना...

कभी रोना... कभी हँसना...

आदत हो गई है!!



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