A letter to Life
A letter to Life
हां ! मुझे कुछ तुमसे है कहना
आज तलक जो कहा ना
हां ! अपना शौहर होने का
थोड़ा फर्ज़ है निभाना ।
निकाह कर मेरी दुल्हन कहलाई तुम
मेरे इस मकान को घर बनाई तुम
तुम्हारे खाने के स्वाद पर कायल मैं
तुम्हारी भीनी खुशबू पर कायल मैं ।
रोजाना सवेरे मुझे गीली जुल्फों से उठाना
मेरे सिरहाने वो हल्के मिट्ठे की चाय रखना
मेरी ब्रश से शर्ट तक का ख्याल रखना
वो तस्सली से शर्ट के बटन लगाना ।
पूजा कर रोजाना माथा मुझसे मिलाना
अपनी मांग में सिन्दूर मुझसे लगवाना
मेरा पसंदीदा नाश्ता रोजाना लगाना
मेरे खाने के बाद उसी थाली में तुम्हारा खाना ।
वो साथ में ऑफिस के लिए निकलना
कभी कभी गाड़ी भी खुद चला लेना
वो हमेशा शांत और सौम्य रहना
पूरा दिन आराम से अपने अपने काम में बिताना ।
शाम की चाय की चुस्की साथ लेना
अपना पूरा दिन इत्मीनान से बयां कर देना
रात के खाने की तैयारी कर टेबल लगाना
वो प्यार से सबको खाना खिलाना ।
मीठी मिश्री से दिन का खत्म करना
तुम्हारा मुझे अपनी बाहों में लेकर सोना
मेरे गुस्से में भी शांत रहना
मेरी गलती को भी सहना ।
माना मैने कभी कहा नहीं तुमसे
मगर हां ये सब कहना था तुमसे
मुझे और मेरे अपनो को मोहब्बत है तुमसे
ए जाना ! कभी खफा ना होना हमसे।।

