हाथी के दांत

हाथी के दांत

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वह आज महिला दिवस पर सोसाइटी की तरफ से चीफ गेस्ट था। उसने अपने भाषण में महिलाओं का सम्मान, उनकी इज्जत करना इत्यादि पर बहुत अच्छा भाषण दिया।

उसके लिए खूब तालियां भी बजी। उसने अपने पैसों से नारी उत्थान के लिए दान भी दिया। उसकी जयकार से सभागार गूँज उठा।

तभी घर से फोन आया तो वो झुंझलाकर घर पहुंचे।

पहुंचते ही वो बीवी पर चिल्ला पड़े 'कौन सी आग लग गई थी जो मुझे अपना भाषण भी पूरा नही करने दिया ।'

घबराई व डरी सहमी पत्नी बोली 'जी वो बेटी मीनू ने हाथ मे चोट लगवा ली है खून बह रहा है कुछ पैसे दे दें तो मैं उसे डॉक्टर के दिखा लाती हूँ।'

'कोई पैसा नही है मेरे पास, कपड़ा बांध दो हाथ मे और उसको इतनी भी अक्ल नही है जो चोट लगवा ली।' उसने इतना कह अलमारी में से व्हिस्की निकालकर एक पेग मारा।

सहमी पत्नी ने डरी लिपटी मीनू को साथ लिया और बाथरूम में चली गई चोट को धोने।

बाहर उसकी आवाजें सब लोग सुन रहे थे।

बाहर उसके दरवाज़े पर नेम प्लेट लगी थी। मिस्टर दिनेश कुमार, मानवाधिकार आयोग (स्त्री उत्थान विभाग)


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