मजबूरी में प्यार जरूरी
मजबूरी में प्यार जरूरी
पड़ोस में रहकर सारा दिन रात लड़ने वाले भाई साहब के घर से उनके मुन्ना होने के बाद लड़ने की आवाजें आनी बंद हो गई थी। जब मुबारकबाद दी, तो हमने कहा "बच्चा कितना अच्छा होता है ना !""अब देखो तुम दोनों में कितना प्यार बढ़ गया"। कभी लड़ाई की आवाज ही नहीं आती ।उन्होंने बोला यहां चुप्पी का कारण प्यार नहीं है बल्कि डर है ।जोर से बोलते ही बच्चा उठ जाता है और रोने लगता है, पूरी रात बच्चे को चुप कराते हुए जागकर ही काटनी पड़ती है। यह तो हमारी
मजबूरी है, प्यार करना ही जरूरी है।

