नारी-एक प्रेरणा

नारी-एक प्रेरणा

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नारी एक शक्ति है - सृजन की शक्ति। भारतीय संस्कृति में नारी को माता के पद पर प्रतिष्ठित किया गया है। नारी स्वयं में एक प्रेरणा है पुरूष के लिए।

नारी में एक ऐसी काबिलियत है जिससे वह हर किसी का दिल जीत लेती है। जिंदगी के रंगमंच पर नारी हर किरदार को बखूबी अदा कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाती है। नारी बिना पुरूष उसी तरह अधूरा है जैसे कि प्राण बिना शरीर। कहते हैं कि हर पुरूष की सफलता के पीछे नारी ही होती है। जीवन के हर क्षेत्र में नारी, नर की प्रेरक सत्ता है। कभी वह बेटी बनती है तो कभी वह जीवन संगिनी और कभी माँ भी। उसके कोमल हाथों का स्पर्श पाकर हर जड़ चीज भी चेतन हो जाती है।

कर्मक्षेत्र में बड़ी नीरसता मिलती है पुरूष को, ऐसे में वह चाहता है कि उसकी भावनाओं को कोई सहलाने वाला हो। नारी का सरल निश्छल स्नेह, पुरूष हृदयाकाश में उज्ज्वल पवित्र नक्षत्र है बिल्कुल भोर के तारे की तरह। सरला और भावपूर्ण सरिता सी मचलते हृदय की नारी किसी की सहयोगिनी बन जाये तो यह उसका सौभाग्य है। नारी नर के जीवन में एक भाव पूर्ण प्रभावकारी तत्व की तरह उपयोगिनी होती है। वह कौन निष्ठुर होगा जिसे नारी का पवित्र स्नेह भाव–विभोर न कर देॽ

नारी एक ऐसा पात्र है जो हर युग में साहित्य सृजन की प्रेरणा बनी है। नारी केवल कोमल और सुडोल काया का ही नाम नहीं बल्कि नारी कोमल कल्पनाओं का भी नाम है। नारी अगर प्रेरणा है तो जीने का सहारा भी। 

अस्तु जीवन में स्नेहसुधा पिलाने वाली नारी का सम्मान करना पुरूष का परम् पावन कर्त्तव्य है। नारी एक ऐसी कविता है जो कवियों को भाव देकर शब्दों को रूप देने का सामर्थ्य रखती है।


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