Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
ज़िंदगी की शाम
ज़िंदगी की शाम
★★★★★

© Tanha Shayar Hu Yash

Romance

1 Minutes   7.1K    4


Content Ranking

अगर ज़िंदगी की शाम हो जाये, तो अपना भी कुछ इंतज़ाम हो जाये,

आंधी चले पत्ते उड़ जाये, तो पतझड़ को भी आराम हो जाये,
फूलों की महक उड़ जाये, तो फूलों का भी नाम हो जाये,

अगर ज़िंदगी की शाम हो जाये, तो अपना भी कुछ इंतज़ाम हो जाये,
फैसला हो हर शख़्स का यहाँ, तो सारा शहर ही बदनाम हो जाये,

करे प्यार कोई यहाँ न फिर सोचे, कहीं ये प्यार न इल्जाम हो जाये,
अगर ज़िंदगी की शाम हो जाये, तो अपना भी कुछ इंतज़ाम हो जाये

नसीब का खेल हो जहां भी अब, सब चाँद तारों के नाम हो जाये,
दुआ न करे मोहब्बत की कोई तनहा, कहीं तनहाई ना उसका ईमान हो जाये।

 

ज़िंदगी की शाम - तनहा शायर हूं

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..