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गुलमोहर
गुलमोहर
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© Rashi Singh

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गुल मैं और गुलमोहर हो तुम

दिल की एक धरोहर हो तुम ,

डूबता रहा सदिओं से जिसमे

वह सुंदर सा सरोवर हो तुम ,

न धूमिल हुई छवि कभी मन से

तितली सी मधुर मनोहर हो तुम 

उमड़-घुमड मन को लचकाती

अविरल बहती नहर हो तुम

साँस अधूरी तुम बिन हर पल

इस दिल की शामो-शहर हो तुम !

दिल सुन्दर तितली

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