आसानी
आसानी
जिसे आसानी से ढूंढा नहीं जा सके उसे पता कहते,
जिसे आसानी से भूला ना जा सके उसे खता कहते!
मैं मुंतजिर हूं सदियों से तेरा, तेरे दर पे खड़ा रहता,
काफिर कह अनचिन्हे हो मुझसे ही मेरा पता पूछते!
पत्थर हूं रास्ते का पत्थर का क्या पता हो सकता है,
मारो ठोकर या रगड़ो सर पे पत्थर क्या पता बदलते?
मरहबा मरहबा करता है जो सुब्होशाम हवा की तरह,
जब मेरा साथ ना मिले तुझे हवा को लापता समझो!
खता और वफा में बस इतना सा है अंतर जानेमन,
जिसे समझते खता उसे की मैंने रब की रजामंदी से!
कोसना छोड़ दो मुझे जुल्म सितमगर कहके हमनशीं,
मैंने जीना छोड़ दिया पर जीता हूं तुझ पे मर मर के!
किसी को कोसना कमजोर की आदत होती जानेजां,
बहादुरों का कौम बोलो कब कहां किसी को कोसते!
