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Mamta Rani

Abstract Fantasy Others

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Mamta Rani

Abstract Fantasy Others

मुसाफिर

मुसाफिर

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मुसाफिर हूँ जिंदगी का और ठिकाना भी यहीं है

फ़लसफ़ा जिंदगी में अपना और बेगाना भी यहीं है


दिल और दिमाग का कैसा ये संगम है जिंदगी में

रोना भी है और साथ में मुस्कुराना भी यहीं है


ख्वाहिशों के समंदर में कितना खोना और पाना है

जितना ऊपर जाना है उतना नीचे आना भी यहीं है


जिंदगी के आशियाने में कब तक कोई सदा रहता 

कभी बेबस जीना भी है और मर जाना भी यहीं हैं


हर आँसू में छिपा गम नहीं ना हर हँसी खुशी होती 

जैसी हो जिंदगी जीना भी है और हँसाना भी यहीं है



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