अधूरा सा मन
अधूरा सा मन
जिसे समझा था अपना
राहों में वो अनजान मिला
एक नजर तक मिला नहीं
दिल यूँ ही वीरान मिला
बेहाल हुए मन का हाल पूछ के
दर्द दिल के कुछ बांट लेता
मीठे बोल दो बोल के
शायद दिल को सँभाल जाता
जख्म दिखाये थे उसको
दर्द उसको सुनाया था
हाँथ छुड़ा कर यूँ चला गया
जैसे ये आँसू पराये थे
सबकुछ होकर भी अधूरा है मन
भीड़ में भी तन्हाई है
एक सवाल बस दिल में
क्या चाहत उसकी अधूरी थी
फिर दिल धीरे से समझाता
गया जो वो किस्मत का हिस्सा था
पर तू खुद को खोना मत
तेरे अंदर भी एक किस्सा था
टूटे दिल भी एक दिन संवरते है
रूखे मौसम भी निखरते है
आज दर्द बहुत गहरा है
पर कुछ घाव वक़्त से ही भरते है
