कांस फूल की महक
कांस फूल की महक
कांस फूल की महक
और ढाक की थाप
आ रही है माँ
करने भक्तों का उद्धार
शंख की गूंज है
रेडियो मे बजती
पुरानी सी धुन है
जहाँ माँ की मूरत में
आस्था बसती है
परम्परा और संस्कार
सबके दिल में रहती है
शारदीय पवन चली ,
माँ दुर्गा का आगमन हुआ
रेडियो पर गूँजता
महालया का भजन हुआ
कांस की सफेदी लिए
खेतों में हरियाली छायी
माँ दुर्गा की मूरत में बसती है
विश्वास ,ऊर्जा और आस्था
हाँथ जोड़के करूँ नमन
जय माँ दुर्गा,जय माँ भवानी
सिंह पे विराजती है माँ कल्याणी
दुष्टो का करती है दमन
हाथ जोड़कर शीश झुकाकर,
मैया, आए हम तेरे द्वार।
भर दो मेरी झोली में,
माँ, अपनी करुणा और प्यार॥
