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Shubhra Ojha

Drama Others

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Shubhra Ojha

Drama Others

कॉलेज के दिन

कॉलेज के दिन

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जूलॉजी, केमिस्ट्री और बॉटनी के दिन,

वो थे प्यारे कॉलेज के दिन,

पहला पीरियड आज भी नहीं भूलता,

वो था इनॉर्गनिक केमिस्ट्री का।


जिसे पूनम मैम पढ़ाती थीं,

कहती याद कर लो सारे एलीमेंट,

साथ में एटॉमिक नंबर और पोजिशन भी,

अब उनको कोई क्या बताता।


हनुमान चालीसा के जैसे रटते,

फिर भी पीरियोडिक टेबल,

हम से याद ना हो पाता।


दूसरा पीरियड जूलॉजी का था,

जो सभी का मनपसंद था,

अंजना मैम जब उस क्लास में आती,

सभी के चेहरे पर एक मुस्कान लाती।


ग्लाइकोलिसिस की सायकिल उन्होंने,

कुछ ऐसे याद कराया था,

एग्जाम में जब देखा क्वेशचन,

सबसे पहले हमने ग्लाइकोलिसिस बनाया था।


तीसरा पीरियड डीके सर का था,

जिनसे कोई नहीं डरता था,

बॉटनी के वो ज्ञाता थे,

लेकिन सारे नोट्स वो हमसे ही बनवाते थे।


कहते कोई दिक्कत हो,

आओ हमसे पूछो,

जरा थोड़ी मेहनत तुम भी करना सीखो।


ये थी सारी क्लास की बातें,

लेकिन लैब की बातें भी बड़ी निराली थी,

बृजेश सर जूलॉजी लैब में मिलते,

जिनको देख सभी अपने फाइल में।


स्नेक और फिश की स्केल,

सही करते मिलते थे,

जब हमारे डायग्राम सही होते,

तब हम बृजेश सर के पास जाते थे,

नहीं तो रीना मैम से ही फाइल चेक कराते थे।


बोटनी लैब की बात निराली थी,

वहाँ मधुबाला मैम क्रोमैटोग्राफी का,

एक्सपेरिमेंट हमें कराती थी।


जब पहली बार माइक्रोस्कोप,

से बैक्टीरिया देखा था,

तब बॉटनी वाली पूनम मैम ने -

बैक्टीरिया और बैक्टरियोफेज़ में अंतर समझाया था।


केमिस्ट्री के लैब से शुरू से ही डर लगता था,

वहाँ जाने का कभी मन नहीं करता था,

केमिस्ट्री का एक ही टेस्ट मन को भाता था,

जो कार्बोहाइड्रेट का मोलिक्श टेस्ट कहलाता था।


उस टेस्ट में क्या था वो याद नहीं,

लेकिन उसका पर्पल रिंग,

दिल को बहुत लुभाता था,

ऐसे थे वो प्यारे दिन...

कॉलेज के मतवाले दिन।


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