Swapnil Saurav
Comedy Drama
aaaaaaaaaaaaaaaa
यादें
१५ साल के बाद...
शिद्दत
मेरी चाहत
एक हसीन मुलाक...
नए ज़माने का फ...
दोस्त की शादी...
यमराज से वार्...
चाची की बीमार...
मेरी ज़िन्दगी ...
रचनात्मक आन्दोलन चलानेवाले कविगण चिल्लाये/ चीखे रचनात्मक आन्दोलन चलानेवाले कविगण चिल्लाय...
वो मेहनत के दिन वो मीठी झिड़कियों के दिन हर किसी को याद आते हैं वो पुराने दिन। वो मेहनत के दिन वो मीठी झिड़कियों के दिन हर किसी को याद आते हैं वो पुराने दिन...
एक पहुंचे हुए संत प्रवचन सुना रहे थे "अज्ञानी" जनता को "मोक्ष" सिखला रहे थे। एक पहुंचे हुए संत प्रवचन सुना रहे थे "अज्ञानी" जनता को "मोक्ष" सिखला रहे थे...
जनवासे में शोर मच गया दूल्हे के दूर का फूफा रूठ गया। जनवासे में शोर मच गया दूल्हे के दूर का फूफा रूठ गया।
चाहते हो शान्ति सुख व निरोग काया योग सभी को कर बांए। चाहते हो शान्ति सुख व निरोग काया योग सभी को कर बांए।
अपने सभी परिजन को देख ले आखरी बार यामलोक तू जाने को अब हो जा तैयार अपने सभी परिजन को देख ले आखरी बार यामलोक तू जाने को अब हो जा तैयार
चलती का नाम गाड़ी बढ़ती का नाम दाढ़ी जो न रखे अनाड़ी चलती का नाम गाड़ी बढ़ती का नाम दाढ़ी जो न रखे अनाड़ी
रंग काला हममें जो मिला तो, खुद अपना रंग हम खो देंगे रंग काला हममें जो मिला तो, खुद अपना रंग हम खो देंगे
आपके टिकट का अग्रिम अनुबंध हो गया है। बस! अब आप तैयारी कीजिए। आपके टिकट का अग्रिम अनुबंध हो गया है। बस! अब आप तैयारी कीजिए।
हिन्दू मुस्लिम की खाई को देना है पाट, अरे कभी खा के तो देखो मजेदार पापड़ी चाट। हिन्दू मुस्लिम की खाई को देना है पाट, अरे कभी खा के तो देखो मजेदार पापड़ी चाट।
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड में फिर से उन्हें गद्दी पर बैठा दिया उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड में फिर से उन्हें गद्दी पर बैठा दिया
बिना कविता सुनने के कोई और मार्ग है क्या? बिना कविता सुनने के कोई और मार्ग है क्या?
हुस्न का दीदार होते ही हमारी कमबख्त आंखें दगा दे जाती हैं. हुस्न का दीदार होते ही हमारी कमबख्त आंखें दगा दे जाती हैं.
बादल को प्रतीक बनाकर वर्तमान परिवेश पर चोट करता एक गीत बादल को प्रतीक बनाकर वर्तमान परिवेश पर चोट करता एक गीत
खुद तो गुमराह है ही जनता को भी गुमराह कर रहा है खुद तो गुमराह है ही जनता को भी गुमराह कर रहा है
निष्ठुर भाव से उन्होंने मना कर दिया फिर मैंने इस तरह आने का कारण पूछा निष्ठुर भाव से उन्होंने मना कर दिया फिर मैंने इस तरह आने का कारण पूछा
जानूँ ! सारी !! मुझे देर हो गई !’ प्रीति पर्व की लो ढेरों बधाई !! जानूँ ! सारी !! मुझे देर हो गई !’ प्रीति पर्व की लो ढेरों बधाई !!
और मुझे करे बदनाम,नाम... मैं देती इसको प्यार-प्यार,ये देतीं हैं मुझे कष्ट कष्ट। और मुझे करे बदनाम,नाम... मैं देती इसको प्यार-प्यार,ये देतीं हैं मुझे कष्ट कष्...
साँच को आंच नहीं आती, और झूठ के पांव नहीं होते। साँच को आंच नहीं आती, और झूठ के पांव नहीं होते।
बैठे बैठे कहते है हर घर की के जीजा, अब कभी न मँगवाना बाहर से पिज्जा। बैठे बैठे कहते है हर घर की के जीजा, अब कभी न मँगवाना बाहर से पिज्जा।