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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Comedy

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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Comedy

ग्रहों की भूल

ग्रहों की भूल

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यह ग्रहों की भूल थी या पंडित की कमजोर गणित 

हमें कुछ समझ नहीं आया

इन ग्रहों के चक्कर में हमारी

शादी का चक्कर चल नहीं पाया ।


या तो शनि की वक्र दृष्टि थी 

या फिर मंगल की टेढ़ी चाल 

इनकी आपस की लड़ाई में 

हो गया हमारा बुरा हाल । 


बुध अपनी जिद पे अड़ा था 

गुरु सामने रास्ता रोके खड़ा था 

शुक्र ने भी अपनी निगाहों को फिराया 

हमारी शादी का चक्कर चल नहीं पाया ।


सूरज क्रोध कर झुलसाने लगा 

सोम भी बादलों के पीछे छिप जाने लगा 

सब नक्षत्रों ने हमें खूब बेवकूफ बनाया 

हमारी शादी का चक्कर चल नहीं पाया । 


आठ पटरानियों वाले श्रीकृष्ण को मनाया

ब्रह्मचारी हनुमान जी को भी शीश नवाया 

भोले भंडारी पर सोमवार को दूध चढ़ाया

पर, हमारी शादी का चक्कर चल नहीं पाया । 


अब आप ही कोई उपाय बतलाओ 

हमें अदद एक कन्या ही बस दिलवाओ 

अब मैं स्टोरी मिरर के द्वारे पर हूं आया 

हमारी शादी का चक्कर चल नहीं पाया ।। 


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