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ज़िन्दगी उदास लम्हों की कहानी
ज़िन्दगी उदास लम्हों की कहानी
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© Gulab Jain

Drama

1 Minutes   7.1K    14


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ग़म की चादर ओढ़ दिल बहला रहा हूँ |

आँख में आंसू छिपाए गा रहा हूँ |

आशियाँ मैंने बनाया फिर नया इक,

रक्स करने बिजलियाँ बुला रहा हूँ |

ठोकरें खाईं हैं इतनी ज़िन्दगी में,

अब सुकूं ही ठोकरों से पा रहा हूँ |

मौत से जब से हुआ है दोस्ताना,

ज़िन्दगी नज़दीक अपने पा रहा हूँ |

ज़िन्दगी उदास लम्हों की कहानी,

'गुलाब' तुम ही सुन लो, मैं सुना रहा हूँ |

Life Sadness Experience

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