Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
प्याज़ की तरह है क़िरदार मेरा
प्याज़ की तरह है क़िरदार मेरा
★★★★★

© Rockshayar Irfan Ali Khan

Abstract

1 Minutes   7.3K    11


Content Ranking

प्याज़ की तरह है क़िरदार मेरा

परत दर परत खुलता ही जाता है

और आखिर में सब ख़त्म हो जाता है

याद रखना, मुझे काटते वक़्त तुम भी बहुत रोओगे

किश्तों में हुई मेरी बर्बादी पर तुम भी आंसू बहाओगे

ना सस्ता है, ना महंगा है

वज़ूद मेरा उड़ता पतंगा है

प्याज़ की तरह है क़िरदार मेरा

परत दर परत जिसमें कई राज़ दफ़न हैं

जिन्हें जानने के लिए खुद से नाराज़ होना पड़ता है

ज़रा संभलकर छूना मुझे, मैं हर जगह अपनी गंध छोड़ देता हूँ

हो तक़दीर का तूफ़ान या लम्हों की लू, मैं सबका तिलिस्म तोड़ देता हूँ

प्याज़ की तरह है क़िरदार मेरा

परत दर परत खुलता ही जाता है

और आखिर में कुछ भी नहीं बचता है

बाक़ी रह जाती है तो बस वही खुशबू

जो ज़िन्दगी के मुँह से हर वक़्त आती रहती है।

वक़्त तूफ़ान खुसबू

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..