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Anjali Pundir

Abstract

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Anjali Pundir

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पीर पराई

पीर पराई

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मैं पीर पराई आँखों की

अपने कजरे की धार नहीं

तेरी राहों का पत्थर हूँ

तेरे हृदय का हार नहीं ।


ये अश्क नहीं तेरी यादों के

धारे ही बहते आते हैं

कुछ गिरते गोरे गालों पर

कुछ हर्फों को धो जाते हैं ।


ओ जाने वाले मुसाफ़िर सुन

दिल देता तुझको ये ही सदा

तिल-तिल मारे है तेरी जुदाई

चुन-चुन मारे हर कातिल अदा।


जो वादा तेरी साँसों ने

मेरी साँसों से चुपके था किया

मैं आज उसी पर जिंदा हूँ

उससे ही धड़के मेरा जिया।


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