Read #1 book on Hinduism and enhance your understanding of ancient Indian history.
Read #1 book on Hinduism and enhance your understanding of ancient Indian history.

Kajal Manek

Inspirational


2.0  

Kajal Manek

Inspirational


वक़्त

वक़्त

2 mins 209 2 mins 209

चाय की प्याली लेकर गिरिराज जी बैठे ही थे कि उन्हें याद आया एक वक़्त वो भी हुआ करता था जब मोबाईल नहीं थे, उस वक़्त सारे दोस्त मिलकर नुक्कड़ में बैठा करते बुजुर्ग चबूतरे में। लेकिन आज की पीढ़ी दिन रात मोबाईल में लगी रहती है।


गिरिराज जी अपने पोते को देखते उसकी कॉलेज की पढ़ाई से लेकर ऑनलाइन चैट सब कुछ वह मोबाईल पर ही करता था। खाने में कुछ नया बने तो अब पहले फ़ोटो खिंची जाती ताकि उसे सोशल मीडिया पर डाल सके। उसके पास वक़्त ही नहीं होता दो पल सुकून के बैठकर बात करने का।


गिरिराज जी इस परिवर्तन के खिलाफ नहीं थे, क्योंकि उन्हें पता था कि कुछ बातें इसमें अच्छी भी है जैसे घर बैठे ऑनलाइन भुगतान वगेरह। लेकिन उन्हें ये जरूर महसूस होता कि जैसे वे लोग घर के बुजुर्गों के पास कुछ समय बैठकर बिताते थे वैसा आज की पीढ़ी के पास वक़्त नहीं है।


वे जानते थे और समझते भी थे कि खुद के कामों लिये भी आज की पीढ़ी को समय चाहिए होता है, लेकिन फिर भी कुछ सुकून के पल तो साथ बिताए जा सकते हैं। बस उन्हें यही बात खलती थी। 


उन्होंने अपने पोते से कहा बेटा तू दिन भर मोबाईल में लगा रहता है तुझे मुझसे बात करने का वक़्त ही नहीं है। एक काम कर मुझे भी एक मोबाईल लाकर दे दे ताकि मुझे भी जब बात करनी हो तो मैं भी तुझे बाकी लोगों की तरह वाट्सअप कर सकूं।


सुनकर उसे अहसास हुआ कि दादा जी कितना अकेला फील करते हैं, उस वक़्त उसने फैसला लिया कि कॉलेज से आने के बाद रोज कुछ वक़्त मोबाईल छोड़कर दादा जी के साथ बिताऊंगा।


तभी उनका पोता अपनी कॉफी लेकर आया दादा पोते बातों में मशगूल हो गए ये उनका अपना बातों का वक़्त जो था।


Rate this content
Log in

More hindi story from Kajal Manek

Similar hindi story from Inspirational