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अजय '' बनारसी ''

Tragedy

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अजय '' बनारसी ''

Tragedy

टाइप

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"इसे सीधे पुलिस में दे देते हैं ऐसे नराधम का इस सोसायटी में रहने की कोई जगह नहीं है।चॉकलेट के बहाने मासूम की इज़्ज़त से खेल रहा था।"

लोगों की भीड़ में अधेड़ उम्र की महिला जिसके शरीर से परफ्यूम की तेज गंध आ रही थी,चीखते हुये पचास वर्षीय ज़मीन पर पीटे जाने से गिरे पुरूष को अपने महँगे चमचमाते सैंडल की खुर से उसके चेहरे को लगभग रौंदते हुये कह रही थी।

 तीन महीने पहले किराये पर आये सुदामा के कारण उसके घर से पर पुरुषों के आने जाने में बाधा उत्पन्न होने लगी थी। घर आमने सामने होने से उसे कुछ असहजता भी हो रही थी।शुरू में एकाकी जीवन जी रहे इस पुरुष से उसने नज़दीकियां बढ़ाने को कोशिश तो की थी लेकिन वह उसके टाइप का नहीं था।संभवतः निराश तो हुई ही थी मौके की तलाश में भी थी।

वहीं पाँच निहारिका जिसके उत्पीड़न की बात वह महिला कर रही थी बदहवास सोच रही थी,अंकल तो ऐसे नहीं है जब भी उनके पास आती थी एक दूरी बनाकर हमसे घुलमिल कर खेला करते थे। अच्छी अच्छी बातें सिखाते रहते थे।किस्से कहानियां सुनाया करते थे।

अभी कल ही तो बारह वर्षीय रसिका को गुड टच बेड टच के बारे में बता रहे थे सावधान कर रहे थे कि आजकल कैसे लोगों से सावधान रहना चाहिये।

और आँटी उन्हें बैड कह रही हैं.



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