तेरी मेरी कहानी
तेरी मेरी कहानी
मैं आपके लिए एक मौलिक, भावनात्मक और रोचक कहानी तैयार करता हूँ। यह कहानी दोस्ती, प्यार, संघर्ष और आत्म-खोज के इर्द-गिर्द बुनी जाएगी ताकि पाठक इससे जुड़ सकें।
तेरी मेरी कहानी
✍️ लेखक: विजय शर्मा एरी
प्रस्तावना
ज़िंदगी की राहें अक्सर हमें ऐसे मोड़ पर ले आती हैं जहाँ हमें अपने दिल और दिमाग के बीच चुनाव करना पड़ता है। यह कहानी दो आत्माओं की है—आरव और सिया—जो अलग-अलग दुनिया से आते हैं, लेकिन एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं।
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पहला अध्याय: मुलाक़ात
दिल्ली की भीड़-भाड़ वाली सड़कों पर आरव का जीवन बेहद साधारण था। वह एक मध्यमवर्गीय परिवार से था, इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था और अपने सपनों को पूरा करने की जद्दोजहद में लगा हुआ था।
सिया, दूसरी ओर, एक बड़े कारोबारी परिवार की बेटी थी। उसके पास सब कुछ था—दौलत, शोहरत, आराम—लेकिन दिल में खालीपन।
उनकी पहली मुलाक़ात कॉलेज की लाइब्रेरी में हुई। आरव किताबों में डूबा था और सिया किसी प्रोजेक्ट के लिए रेफ़रेंस खोज रही थी। एक ही किताब पर दोनों का हाथ पड़ा और वहीं से कहानी शुरू हुई।
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दूसरा अध्याय: दोस्ती
धीरे-धीरे उनकी बातचीत बढ़ी। आरव को सिया की मासूमियत भा गई और सिया को आरव की सादगी।
- वे साथ पढ़ते
- कैंपस में घूमते
- चाय की टपरी पर घंटों बातें करते
दोस्ती गहरी होती गई, लेकिन दोनों के दिल में एक अनकहा एहसास पलने लगा।
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तीसरा अध्याय: इज़हार
एक शाम, जब बारिश हो रही थी, आरव ने हिम्मत जुटाकर कहा—
"सिया, मुझे लगता है मेरी दुनिया तेरे बिना अधूरी है।"
सिया मुस्कुराई, उसकी आँखों में चमक थी। उसने जवाब दिया—
"आरव, मैं भी यही महसूस करती हूँ।"
उस दिन से उनकी दोस्ती प्यार में बदल गई।
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चौथा अध्याय: संघर्ष
लेकिन ज़िंदगी इतनी आसान कहाँ होती है।
- सिया के परिवार को यह रिश्ता मंज़ूर नहीं था।
- आरव की आर्थिक स्थिति उनके लिए बड़ी रुकावट थी।
- समाज की दीवारें उनके बीच खड़ी हो गईं।
आरव ने नौकरी की तलाश शुरू की, ताकि वह सिया के परिवार को साबित कर सके कि वह काबिल है।
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पाँचवाँ अध्याय: दूरी
हालात ने उन्हें अलग कर दिया। सिया को विदेश भेज दिया गया और आरव दिल्ली में रह गया।
- फोन कॉल्स कम हो गए
- ईमेल्स का जवाब देर से आने लगा
- दूरी ने दिलों में बेचैनी भर दी
लेकिन दोनों ने हार नहीं मानी।
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छठा अध्याय: संघर्ष की जीत
आरव ने मेहनत से एक बड़ी कंपनी में नौकरी पा ली। उसकी लगन और ईमानदारी ने उसे ऊँचाइयों तक पहुँचाया।
सिया ने भी विदेश में अपनी पढ़ाई पूरी की और अपने परिवार को समझाने की कोशिश की। धीरे-धीरे उनका विरोध कम हुआ।
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सातवाँ अध्याय: मिलन
कई सालों बाद, जब आरव एक कॉन्फ़्रेंस के लिए लंदन गया, वहाँ उसकी मुलाक़ात सिया से हुई।
- वही मुस्कान
- वही अपनापन
- वही अधूरी कहानी
दोनों ने एक-दूसरे को गले लगाया और महसूस किया कि दूरी चाहे कितनी भी हो, सच्चा प्यार कभी कम नहीं होता।
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आठवाँ अध्याय: तेरी मेरी
सिया का परिवार अब मान चुका था। आरव ने अपनी मेहनत से सबका दिल जीत लिया था।
उनकी शादी हुई और ज़िंदगी ने नया रंग लिया।
आरव ने कहा—
"तेरी मेरी कहानी अब पूरी हुई।"
सिया ने मुस्कुराकर जवाब दिया—
"हाँ, अब यह कहानी सिर्फ़ हमारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल बनेगी।"
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उपसंहार
यह कहानी हमें सिखाती है कि प्यार सिर्फ़ एहसास नहीं, बल्कि संघर्ष और विश्वास का नाम है। जब दो दिल सच्चे होते हैं, तो दुनिया की कोई ताक़त उन्हें अलग नहीं कर सकती।
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