वर्षा में नया साल
वर्षा में नया साल
वर्षा में नया साल"
लेखक: विजय शर्मा एरी (Vijay Sharma Erry)
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प्रस्तावना
नया साल हमेशा उम्मीदों और संकल्पों का प्रतीक होता है। लोग आतिशबाज़ी, रोशनी और जश्न के साथ इसका स्वागत करते हैं। लेकिन जनवरी 2026 की पहली रात भारत में कुछ अलग थी। मौसम ने सबको चौंका दिया। जहाँ लोग साफ आसमान की उम्मीद कर रहे थे, वहाँ अचानक बारिश ने दस्तक दी। यह कहानी उसी रात और उसके बाद की घटनाओं पर आधारित है—जहाँ बारिश ने न केवल जश्न को बदला, बल्कि लोगों के दिलों में नई सोच और नई उम्मीदें भी जगाईं।
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पहला अध्याय: जश्न की तैयारी
अमृतसर की गलियों में रोशनी की लड़ियाँ टंगी थीं। हर घर में मिठाइयाँ बन रही थीं। बच्चे पटाखों की थैलियाँ सँभाल रहे थे।
विजय शर्मा, एक साधारण शिक्षक, अपने परिवार के साथ छत पर खड़े होकर आतिशबाज़ी देखने की तैयारी कर रहे थे। उनकी बेटी अनन्या ने आसमान की ओर इशारा किया—“पापा, देखो! बादल आ गए हैं।”
विजय ने मुस्कुराते हुए कहा, “कोई बात नहीं, थोड़ी सी बारिश हमारे उत्सव को और खास बना देगी।”
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दूसरा अध्याय: बारिश की दस्तक
घड़ी ने बारह बजाए और आतिशबाज़ी शुरू हुई। लेकिन तभी तेज़ बूँदें गिरने लगीं। लोग छतों से भागकर घरों में घुस गए।
कुछ लोग नाराज़ हुए—“इतनी मेहनत बेकार गई।”
पर विजय ने देखा कि बच्चे बारिश में नाच रहे थे। उनकी हँसी ने माहौल को बदल दिया।
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तीसरा अध्याय: अनिश्चितता का सबक
विजय ने सोचा—“जीवन भी इस मौसम जैसा है। हम योजनाएँ बनाते हैं, पर परिस्थितियाँ बदल जाती हैं। असली खुशी तो बदलाव को अपनाने में है।”
उन्होंने अनन्या से कहा, “बेटा, यह बारिश हमें सिखा रही है कि हर पल को जीना चाहिए, चाहे जैसा भी हो।”
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चौथा अध्याय: मोहल्ले की कहानी
बारिश ने मोहल्ले के लोगों को एक साथ ला दिया। जो परिवार पहले अलग-अलग जश्न मनाते थे, वे सब एक ही छतरी के नीचे इकट्ठा हो गए।
किसी ने गाना गाया, किसी ने ढोल बजाया। बारिश ने सबको जोड़ दिया।
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पाँचवाँ अध्याय: संघर्ष और उम्मीद
विजय का पड़ोसी, राजेश, किसान था। उसने कहा, “यह बारिश मेरे खेतों के लिए वरदान है। जहाँ लोग इसे बाधा मान रहे हैं, वहीं मेरे लिए यह नई उम्मीद है।”
विजय ने महसूस किया कि हर घटना का असर अलग-अलग होता है। किसी के लिए समस्या, तो किसी के लिए समाधान।
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छठा अध्याय: सोशल मीडिया का रंग
बारिश की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर छा गए। लोग लिखने लगे—“नया साल, नई बारिश, नई शुरुआत।”
विजय ने भी एक पोस्ट किया:
“बारिश ने पटाखों को बुझा दिया, पर उम्मीदों को और चमका दिया।”
उनकी पोस्ट पर सैकड़ों लाइक आए।
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सातवाँ अध्याय: आत्मचिंतन
रात के अंत में विजय ने डायरी में लिखा—
“अगर मैं अपने जीवन में एक चीज़ बदल सकता, तो वह होगी—डर को छोड़कर हर परिस्थिति को अपनाना। बारिश ने मुझे यह सिखाया कि खुशी योजनाओं में नहीं, बल्कि स्वीकार करने में है।”
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आठवाँ अध्याय: नई सुबह
सुबह जब सूरज निकला, तो धरती चमक रही थी। बच्चे स्कूल की छुट्टी का आनंद ले रहे थे। किसान खेतों में खुश थे।
विजय ने परिवार से कहा, “यह नया साल हमें याद दिलाता है कि जीवन की सबसे बड़ी ताकत है—अनिश्चितता को गले लगाना।”
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निष्कर्ष
यह कहानी सिर्फ बारिश की नहीं, बल्कि जीवन की है। जब योजनाएँ टूटती हैं, तब नई राहें बनती हैं।
जनवरी 2026 की बारिश ने भारत को यही सिखाया—अनिश्चितता ही जीवन का असली उत्सव है।
