तेरे बिना भी क्या जीना
तेरे बिना भी क्या जीना
जिनको इश्क होता है। और परवान नहीं चढ़ता इन को रुला कर के ही जाता है। और वह सोचने लगते हैं तेरे बिना भी क्या जीना
इसी बात पर बहुत पुरानी एक घटना याद आ रही है जो आपके साथ शेयर करती हूं।
करीब 42 ,43साल पहले की यह घटना है हम उसको प्रमोद नाम से संबोधित करेंगे।
एक बार की बात है हम लोग हमारे हॉस्पिटल के सारे डॉक्टर्स लोग एक फार्म हाउस में पिकनिक मनाने गए थे।
वहां गए बहुत बहुत मजे करें।
जब हम निकल रहे थे, तो फार्महाउस की जो मालकिन थी मेरे पति को बुलाने आई।
कि आप आओ और मेरे बेटे को जरा देख लो। मैं भी उनके साथ चली गई।
वहां जाकर के देखा 25 से 30 साल के बीच का लड़का होगा। बेडरिडेन था।
और उसको कुछ प्रॉब्लम हो रही थी।
खाली वह एक ही लाइन बोले जा रहा था।
तूने अच्छा नहीं किया ,तूने अच्छा नहीं किया, और कुछ अंटं शटं नाम बोल रहा था।
डॉक्टर साहब तो पेशेंट को देख कर के बाहर निकल गए। मैं वहीं रुक गई। मेरा स्वभाव थोड़ा खोजी है। थोड़ी देर के लिए।
मैंने उस लड़के की मां से बात करने के लिए उनसे पानी मांगा। फिर मैं वहां बैठ गई,
और मैंने उससे पूछा कि इस लड़के को क्या हुआ।
तब उन्होंने बताया यह लड़का किसी लड़की से प्यार करता था। दोनों एक ही जाति के थे।
मगर सोशल स्टेटस में बहुत फर्क होने के कारण, लड़की के मां बाप ने शादी करने से मना कर दिया। और लड़की की शादी दूसरी जगह कर दी।
जब इसको लड़की की शादी का समाचार मिला तो इसमें घर के ऊपर से छलांग लगा दी।
इसके कारण इसके सिर में चोट लगी और पैरालाइज हो गया।
पूरे 5 साल हो गए इसी कंडीशन में है।
एक ही बात बोलता है तूने अच्छा नहीं करा तूने अच्छा नहीं करा
मां बाप का इकलौता लड़का था।
जब उसको घर ले जाते तो ,उसको दौरे पड़ने लगते। इस कारण उसको फार्म हाउस में उसकी मां की साथ रख रखा था।
मुझे यह बात सुनकर के बहुत ही दुख हुआ कि, किस तरह से मां-बाप के मनमानी के कारण खाली सोशल स्टेटस के फर्क होने के कारण उनके प्यार को परवान नहीं चढ़ने दिया गया। और यह इश्क उस लड़के को और उसकी परिवार को जिंदगी भर के लिए रुला गया।
अभी के जमाने में तो थोड़ा फर्क आ गया है शो मस्ट गो वाली स्थिति आ गई मगर पहले के टाइम में ऐसा कम ही होता था। दोनों में से जो भी ज्यादा संवेदनशील होता था वह कोई गलत कदम उठा ही जाता ऐसा मैंने बहुत देखाहै
मेरी हर मां बाप को यह सलाहहै या तो बच्चों की परवरिश इस तरह से करो सब बातें बताएं सही गलत की जानकारी दो।
और पात्र सही हो तो उनके प्यार के दुश्मन मत बनो। जिससे आप की और उनकी दोनों की जिंदगी अच्छी चलती है। यह मेरा अनुभव है।

