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Shailaja Bhattad

Abstract Tragedy

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Shailaja Bhattad

Abstract Tragedy

स्वार्थ परायणता

स्वार्थ परायणता

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स्वार्थ परायणता 

"आज जब तुम्हारी समस्या के समाधान के लिए उसने आवाज उठाई, तो वह सही हो गई और जब वह खुद की समस्या के लिए आवाज उठाती है, तो आप लोग मुँह बनाती हैं; उसे बुरा-भला कहती हैं, यानी वह तो आपसे मित्रता निभा रही है, लेकिन आप लोगों का उससे संबंध सिर्फ अपना उल्लू सीधा करने भर का है।"

 "कौन सी समस्या आस्था ? किसने किया समाधान?" 

 
 आस्था का स्नेहा से शिकायती लहजे  में बात करने पर अपार्टमेंट में नई-नई आई वृंदा ने पूछा। 

"कई दिनों से कॉरिडोर में बच्चों को खाना खिलाने के लिए किसी की आया अजीबो-गरीब कसरतें करती है। भिन्न-भिन्न आवाज़ें निकालती है। जब स्नेहा द्वारा आया से सीधे बात करने पर उसने नहीं सुना; तब स्नेहा ने अपनी मित्र मंडली में अपनी तकलीफ जाहिर की। सीमा ने जिसका स्वभाव ही है, सबकी मदद करना, तुरंत आया द्वारा किए जा रहे होहल्ले को बंद करवा दिया। तब स्नेहा बहुत खुश हुई, लेकिन जब सीमा और उसके परिवार को किसी फ्लैट के एग्जॉस्ट फैन के जोर-जोर से आवाज करने से तकलीफ होने लगी, तब सीमा ने अपने लिए आवाज़ उठाई तब यही स्नेहा उसे  बुरा-भला कहने से नहीं चूकी।"
शैलजा


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