suman singh

Inspirational


4.4  

suman singh

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सफलता

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आज सीमा की शादी के कार्ड छप कर आ गए है। निशा ने काडोॅ का गट्ठर खोला और उसमें से एक कार्ड निकालकर अपनी सास कमला को दिया, देखो मम्मी जी कार्ड अच्छे है ना? कमला कार्ड देखते ही भावुक हो उठी और मन में अपनी जीत की खुशी भी थी। 

सीमा 2 वर्ष की थी तब ही कमला के पति का देहान्त हो गया था, सीमा कमला की सबसे छोटी बेटी थी। कमला के तीन बच्चे थे। सबसे बड़ा रोहित, उससे छोटी बहन सरोज और सबसे छोटी सीमा। अचानक पति की मृत्यु के बाद कमला टूट गई थी, उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या होगा ? बच्चों का पालन -पोषण कैसे होगा ? कमला के दोनों देवर भी मजदूरी करके अपना घर चलाते थे,और शराब भी पीते थे इसलिए कमला अपने बच्चों को उनसे दूर ही रखना चाहती थी।

पति की मृत्यु के एक महीने बाद भी कमला सुन्न रहती थी एक दिन कमला को उदास बैठी देखकर पड़ोस की महिला आ गई और कहने लगी-बहन जी रोहित को तो उसकी बुआ के पास भेज दो, और सरोज को इसके मामाजी के पास। तुम्हारे पास एक बच्ची रहेगी तो तुम अपना खर्चा कैसे भी चला लोगी।

यह सुनकर कमला को एक झटका सा लगा और उस औरत की तरफ देखने लगी। क्या कहा तुमने ? पति छोड़कर चला गया तो बच्चों को भी अपने से दूर भेज दूँगी ? आखिर अपने बच्चों को मैं सबको क्यों बाँटती फिरूं? नहीं ! कोई कहीं नहीं जाएगा। मैं अपने बच्चों को खुद पालूंगी। मैं तीनों को समझदार और इज्जतदार इन्सान बनाऊँगी। कमला वहाँ से तुरन्त उठी और अपने काम के बारे में सोचने लगी।

कमला को थोड़ी बहुत सिलाई पहले से आती थी, उसने सिलाई को अपना रोजगार बनाया, दो महीनों की ट्रेनिंग के बाद कमला का काम अच्छा चलने लगा। रोहित को एम.ए.बीएड करवाया और सरोज की 10वी के बाद शादी कर दी गई। 

सीमा भी बीएड कर चुकी थी, रोहित की पास के गाँव में सिनियर सैकेंडरी स्कूल में टीचर की जाॅब लग गई। 

रोहित के ज्वाइन करने के चार महीनों बाद ही निशा भी उसी स्कूल में टीचर बनकर आ गई थी। निशा अच्छे घर से थी और सुंदर भी थी। निशा के पापा ने उसके लिए एक लड़का देख रखा था जो एक तहसीलदार था। वह चार भाईयों में सबसे छोटा था और थोड़े बिगड़ैल स्वभाव का था। जब निशा को देखने आया था तो उसके मुँह से शराब की बदबू आ रही थी। निशा को पसंद नहीं था लेकिन पापा का कहना था कि बहुत पैसे वाले लोग है तू वहाँ राज करेगी, लेकिन रिश्ता अभी तय नहीं हुआ था। जब निशा ने रोहित को देखा तो रोहित का चेहरा निशा के दिल में उतर गया, उसे रोहित के अंदर कोई भी कमी ढूँढने पर भी नहीं मिल रही थी। 

निशा मन ही मन रोहित को चाहने लगी थी, हाल तो रोहित का भी ऐसा ही था लेकिन डरता था कि निशा के बड़े सपने होंगे और मेरे पास तो कुछ नहीं है माँ ने बड़ी मुश्किल से पाल - पोसकर यहाँ तक पहुँचाया है ।

एक दिन स्टाफ की एक टीचर ने मज़ाक किया ,निशा तुम शादी के लिए इधर-उधर लड़के क्यों तलाश रही हो , तुम रोहित से शादी क्यों नहीं कर लेती ? अच्छी जाॅब है, स्मार्ट है, हैण्डसम है। दोनों साथ-साथ भी रहोगे। निशा ने भी हँसते हुए कहा- हाँ ! मैं भी यहीं चाहती हूँ लेकिन रोहित एकदम बुद्धू है कुछ समझता ही नहीं । दूसरी टीचर ने चिल्लाकर कहा- क्या ? तुम सचमुच ऐसा चाहती हो ? हम तो मजाक कर रहे थे, मैं अभी जाकर रोहित से बात करती हूँ।

चार दिन बाद पूरे स्टाफ ने पिकनिक मनाने का प्रोग्राम बनाया और वहाँ जाकर दोनों को अकेले छोड़ दिया। दोनों एक घंटे तक बातें करते रहे। शुरुआत रोहित ने की -निशा मैं चाहता हूँ कि माँ को एक अच्छी बहु मिले जो उनकी इज़्ज़त कर सके। मैं डरता हूँ कि कहीं नौकरीपेशा लड़की अपनी कमाई का राॅब नहीं झाड़े।

निशा ने तुरंत जवाब दिया, रोहित क्या तुम मुझे ऐसी लड़की समझते हो ? मैं ऐसी नहीं हूँ । अगर मैं ऐशो -आराम ही पाना चाहती तो मैं उसी तहसीलदार से शादी कर लेती। लेकिन मैं ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है। मुझे पैसे नहीं एक अच्छा इन्सान चाहिये। एक ऐसा घर चाहिये जिसमें मेरी इज़्ज़त हो सके। तुम एक अच्छे इन्सान हो। अपनी जिम्मेदारी को समझते हो, लेकिन निशा मेरे पास कुछ नहीं है बस दो कमरों का घर है। नहीं रोहित , तुम्हारे पास सबकुछ है तुम्हारे पास अच्छी जाॅब है ,तुम स्मार्ट हो, हैण्डसम हो और फिर हम दोनों कमायेंगे तो क्या कमी रहेगी ? सब कुछ ठीक हो जायेगा ।

लेकिन निशा माँ का कहना है कि पहले सीमा की शादी करेंगे वो मेरी छोटी बहन है और बाद में मेरी।

नहीं रोहित हम माँ को समझायेगे। सबसे पहले आप पूरा घर बनाओगे। लेकिन निशा उसके लिए पैसे कहाँ से आयेगे ? लोन लेकर, निशा ने मुस्कराकर कहा। लेकिन निशा, अब लेकिन वेकिन कुछ नहीं । दो , तीन महीनों में घर पूरा हो जाएगा और उसके बाद हम शादी करेंगे। शादी का खर्चा पापा उठायेंगे क्योंकि मैं उनकी इकलौती बेटी हूँ और सीमा को हम आगे पढ़ाएंगे उसके बाद उसकी शादी करेंगे।

निशा की सारी बातें रोहित की समझ में आ गई और सब कुछ ऐसा ही हुआ। कमला के लिए तो यह एक सपने जैसा था, वह इतने बड़े घर की मालकिन बन गई थी और एक सुंदर, सुशील बहु घर में आ गई थी जो सबका ख्याल रखती थी। 

कमला ने ठण्डी सांस ली और अपने पति की फोटो के पास जाकर बोली, आज मैं अपनी परीक्षा मे पास हो गई हूँ , मैने बहुत बड़ी सफलता प्राप्त कर ली है। मैने अपने बच्चों का भविष्य इस तरह से संवारा है जो आपका कोई भी रिश्तेदारी नहीं कर सकता था मैने अपने बेटे को वैसा ही बनाया है जैसी आप हमेशा कहा करते थे और मुझे आशा है कि आप यह सब कुछ देख रहे होंगे । 


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