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sunayna mishra

Abstract

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sunayna mishra

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श्रीकांत कथा

श्रीकांत कथा

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उसे मजा चखाना था। तो कह दिया कि सामने वाली सड़क पर सौ मीटर की दौड़ लगा कर वापस आ तो समोसे खिलवाऊंगा। श्रीकान्त दौड़ पड़ा। तीस मीटर तक वर्मा अंकल के घर के सामने

पहुंचते ही गुलेल से निकले कंचे ने अपना काम किया , वर्मा अंकल की खिड़की का एक कांच ...छनाक। 

अंकल तेजी से बाहर निकले , श्रीकान्त भागता दिखा। अंकल अंदर गए कि कपड़े बदलकर श्रीकान्त के घर शिकायत करने जाएंगे। वापसी दौड़ में श्रीकान्त के उनके घर के सामने  पहुंचने से पहले ही एक बार फिर गुलेल से निकले कंचे ने 

अपना काम किया , अंकल की खिड़की का एक और कांच .... छनाक। अंकल भाग कर फिर बाहर ....देखा ....श्रीकान्त  भागा जा रहा है। समोसे तो बाद की बात है। 

वर्मा अंकल हमारे सामने ही श्रीकान्त को पकड़कर उसके घर ले गए। अपने पापा से खूब पिटा। रंगे हाथों जो पकड़ा गया था।  गुलेल से कंचा चलाने वाले का तो जिक्र भी नही हुआ l


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