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sunayna mishra

Abstract

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sunayna mishra

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कक्षा आठ

कक्षा आठ

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बड़े भाई दूसरे शहर पढ़ने चले गए। उनकी  पुरानी साइकिल हमको मिल गई। पैदल से 

साइकिल सवार बन गए। घुमन्तु प्रवृत्ति।पूरा शहर घूमना शुरू हो गया। सदैव कोई न कोई मित्र लादने की आदत। एक बार किसी की स्पोर्ट्स साइकिल दीख गई। दिमाग में कीड़ा कौंधा। प्लास , पेंचकस व् रिंच लेकर जुट गए एक दो घण्टे में अपनी साइकिल का मड गार्ड और कैरियर खोल के बना दी स्पोर्ट्स साइकिल। दो दिन घूम घूम के स्पोर्ट्स साइकिल का मज़ा लिया। तीसरे दिन वर्षा का मज़ा लेने के लिए बारिश में निकल पड़े। कच्ची सडकों पर भी साइकिल घुमा दी। एक अंकल से रुक कर नमस्ते कर ली। फिर जैसे ही आगे बढ़े , उन्होंने आवाज देकर रोका और कहा क़ि अपनी कमीज 

पीछे से देखो।उतार कर देखी। कीचड़ मिटटी से सरोबार। नई सफ़ेद शर्ट। मड गार्ड हटाने का नतीजा। मूड हुआ ख़राब। मन में आई नई खुराफात।चल दिए ढूँढने नया मुर्गा।दोस्त मिला। मूंजी फ़ंसा। स्पोर्ट्स साइकिल का स्वाद उसे भी चखने को थमा दी साइकिल ,भाई तू भी थोड़ी सी चला ले। उसने चलाई। हुआ कबाड़ा उसकी शर्ट का। एक से दो हो गए। मिलकर 

तीसरे , चौथे फिर पांचवें मुर्गे की शर्ट का शिकार किया। घर लौट कर चुपके से शर्ट बदली। साइकिल को पुराना रूप दिया।

मड गार्ड का महत्त्व समझ में आ गया। आठवी क्लास की बात है।


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