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सच्चाई का हलवा

सच्चाई का हलवा

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वह दुनिया का सबसे बड़ा बावर्ची था, ऐसा कोई पकवान नहीं था, जो उसने न बनाया हो। आज भी पूरी दुनिया को सच के असली मीठे स्वाद का अनुभव हो, इसलिये वह दो विशेष व्यंजन सच और झूठ के हलवे को बनाने जा रहा था। उसे विश्वास था कि दुनिया इन दोनों व्यंजनों को खाते ही समझ जायेगी कि अच्छा क्या है और बुरा क्या।

उसने दो पतीले लिये, एक में ‘सच’ को डाला दूसरे में ‘झूठ’ को। सच के पतीले में खूब शक्कर डाली और झूठ के पतीले में बहुत सारा कड़वा ज़हर सरीखा द्रव्य। दोनों में बराबर मात्रा में घी डाल कर पूरी तरह भून दिया।

व्यंजन बनाते समय वह बहुत खुश था। वह एक ऐसी दुनिया चाहता था, जिसमें झूठ में छिपी कड़वाहट का सभी को अहसास हो और सच की मिठास से भी सभी परिचित रहें। उसने दोनों पकवानों को एक जैसी थाली में सजा कर चखा।

और उसे पता चल गया कि सच फिर भी कड़वा ही था और झूठ मीठा... हमेशा की तरह।


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