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ritesh deo

Abstract Romance

3  

ritesh deo

Abstract Romance

सच्चा प्यार

सच्चा प्यार

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सुजित के फोन पर मैसेज बीप सुनाई पड़ी। वह मुस्कुराया। उसने मन ही मन सोंचा। लगता है यह भी मुझ पर फिदा हो गई। उसने मैसेज पढ़ा।


'ओके....कहाँ मिलना है ?"


सुजित कुछ क्षणों तक सोंचता रहा। उसके दिमाग में कई सारे विकल्प थे। चुनाव उसे करना था। कई अच्छे रेस्टोरेंट्स के बारे में सोंचने के बाद उसने तय किया कि उसका स्टूडियो अपार्टमेंट सबसे सही जगह है। यहाँ ठीक से जान पहचान हो सकती है। यह खयाल आते ही वह एक बार फिर मुस्कुराया। 


उसने मैसेज के उत्तर में अपने अपार्टमेंट का पता भेज दिया। उस तरफ से कुछ ही क्षणों में जवाब आया। 


"ओके.... विल कम ऐट सेवेन इन इवनिंग।"


सुजित सक्सेना एक प्रसिद्ध लेखक था। खासकर युवा वर्ग का वह चहेता था। उसके लिखे उपन्यासों का विषय प्यार और रोमांस जो होता था। 


उसके सोशल एकाउंट पर उसकी तारीफ के कई मैसेज होते थे। लोगों का कहना था कि उसे प्यार और रोमांस की बहुत अच्छी समझ है। उसकी कहानियां दिल में उतर जाती हैं। 


कई युवा प्रेमी उससे प्रेम में सफल कैसे हुआ जाए इस विषय पर मशविरा मांगते थे। इनमें अधिकांश वो लड़के होते थे जो उसके उपन्यास के नायकों की तरह चंद ही मुलाकातों में अपनी प्रेमिका को प्रेम दीवानी बना देने की इच्छा रखते थे।


सुजित को ऐसे लोगों को सलाह देना बहुत अच्छा लगता था। उसने कुछ ही दिनों पहले एक मशहूर पत्रिका में इस विषय पर एक कॉलम लिखना भी शुरू किया था। 


सुजित का लेखन करियर बहुत अच्छा चल रहा था। अब तक उसने कुल सात उपन्यास लिखे थे। इनमें से चार बेस्टसेलर थे। दो को लोगों ने खूब सराहा था। सातवां उपन्यास अभी पिछले हफ्ते ही आया था। पर सुजित को उसके बेस्टसेलर होने की पूरी संभावना थी।


उसके पहले उपन्यास पर बॉलीवुड के एक मशहूर निर्माता निर्देशक फिल्म बनाने की योजना बना रहे थे। इस बात की चर्चा सब तरफ हो रही थी। सुजित का भाव बढ़ गया था।


सुजित को आकर्षक रूप कुदरत की तरफ से मिला था। पर उसने अपनी अक्ल और वाकपटुता से उस आकर्षक व्यक्तित्व को और निखार दिया था। जब भी वह महिलाओं से बात करता तो अधिकांश उसके प्रभाव में आए बिना ना रहतीं। 


लोग सुजित को कैसेनोवा कहते थे। उसके अफेयर्स की लंबी लिस्ट उसे इस खिताब का प्रबल दावेदार बनाती थी। सुजित को भी लगता था कि वह आसानी से किसी भी लड़की को अपना दीवाना बना सकता है।


आज उसे लग रहा था कि उसकी यह सोंच सही साबित हुई है। उसे जिस लड़की का मैसेज मिला था उसका नाम निकिता सावलानी था। वह एक हिंदी दैनिक की पत्रकार थी। वह निकिता से अपनी नई किताब की प्रेस रिलीज़ पर मिला था। 


पत्रकार उससे किताब के बारे में सवाल कर रहे थे। वह उनके सवालों के जवाब दे रहा था। जब निकिता की बारी आई तो उसने एक अलग ही तरह का सवाल कर दिया।


"सर....आपके लेखन का विषय प्यार और रोमांस है। क्या आप प्यार को समझते हैं ? आपकी नज़र में रोमांस क्या है ?"


जब सुजित ने उसके सवाल सुने तो उसे अच्छा नहीं लगा। उसके मन में सवाल उठा। 'क्या इस लड़की को मेरे बारे में पता नहीं। इस विषय पर आधारित मेरी चार किताबें बेस्टसेलर हैं। ये लड़की मुझसे पूँछ रही है कि क्या मैं प्यार और रोमांस को समझता हूँ।'


सुजित ने तंज़ भरे लहज़े में कहा। 


"अब मेरे पाठक तो यही समझते हैं कि मुझे प्यार और रोमांस का मतलब पता है। तभी तो मेरी किताबें बेस्टसेलर हैं। लोग इस विषय में मुझसे राय लेते हैं।"


सुजित ने सोंचा था कि यह जवाब निकिता के लिए काफी होगा। वह दूसरे पत्रकार की तरफ देखने लगा। पर सवाल निकिता ने ही किया।


"सर....आपने जो कहा वह सही है। आपके पाठक आपको बहुत चाहते हैं। आप जो लिखते हैं उसे पसंद करते हैं। पर मैं ये जानना चाह रही थी कि आपकी किताबों में जो प्यार व रोमांस दिखता है क्या वही सही मायनों में प्यार है ?"


"जी बिल्कुल..... किसी को पहली बार देखते ही आपके दिल की धड़कनें बढ़ जाएं। आपकी रातों की नीदें उड़ जाएं। आप उससे मिलने को बेचैन रहें। यही सब प्यार है। अपने साथी को अपने प्यार का एहसास दिलाना । उसे तोहफे देना। चांदनी रात में एक दूसरे का हाथ थाम कर बीच या किसी रोमांटिक जगह पर टहलना। यही तो रोमांस है।"


सुजित ने बाकी सारे पत्रकारों की तरफ नज़र दौड़ाई। सब अपना सवाल पूँछने को बेचैन थे। निकिता अभी उसके जवाब से संतुष्ट नहीं थी। उसने एक और सवाल पूँछना चाहा। सुजित ने उसे टोंकते हुए कहा।


"मिस निकिता.... औरों को भी मौका दीजिए। सभी अपने पेपर की तरफ से मुझसे सवाल करना चाहते हैं। आप यदि चाहें तो मैं बाद में आपको अलग से इंटरव्यू दे दूँगा।"


निकिता चुप हो गई। बाकी पत्रकार सुजित से सवाल करने लगे। प्रेस कान्फ्रेंस समाप्त होने पर सुजित जब उठ कर हॉल से बाहर निकलने लगा तो उसने अपने सेक्रेटरी को निर्देश दिया कि वह निकिता का नंबर पता करे। 


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