रात के 2 बजे वाली वो (खामोश जज़्बातों की गूंज)
रात के 2 बजे वाली वो (खामोश जज़्बातों की गूंज)
सीन: रात का गहरा सन्नाटा और एक अनजाना मैसेज) रात के ठीक 2 बज रहे थे। मुंबई की भागती हुई ज़िंदगी भी इस वक़्त थोड़ी सुस्ता रही थी। आर्यन अपने कमरे की बालकनी में खड़ा था। उसके हाथ में कॉफी का आधा खाली मग था और आँखों में एक अजीब सी खामोशी। ऑफिस में दिन भर 'सख्त' और 'बिंदास' दिखने वाला आर्यन, रात के इस अकेलेपन में अक्सर खुद से हार जाता था। उसके दिमाग में बार-बार रिया का ही चेहरा घूम रहा था—वो रिया, जिसे वो बेइंतहा चाहता था, पर कभी कह नहीं पाया। तभी, सन्नाटे को चीरते हुए उसके फोन की स्क्रीन रोशन हुई। एक 'टिंग' की आवाज़ गूंजी। आर्यन ने फोन उठाया। स्क्रीन पर एक अनजान नंबर (Unknown Number) से व्हाट्सएप मैसेज था। कोई प्रोफाइल पिक्चर नहीं थी। अनजान नंबर: "सो गए क्या?" आर्यन की भृकुटी तन गई। रात के दो बजे कोई स्पैम मैसेज? उसने झल्लाहट में रिप्लाई टाइप किया। आर्यन: "भाई, जो भी है... रात के 2 बज रहे हैं। कस्टमर केयर वाले भी अब तक सो जाते हैं। कौन है?" कुछ सेकंड तक 'Typing...' लिखा आया। फिर एक मैसेज पॉप-अप हुआ। अनजान नंबर: "मैं कस्टमर केयर नहीं हूँ आर्यन। पर हाँ... तुम्हारी 'केयर' ज़रूर करना चाहती हूँ। 😉" ये पढ़ते ही आर्यन की नींद पूरी तरह उड़ गई। उसके दिल की धड़कन हल्की सी तेज़ हो गई। कोई उसका नाम जानता था। आर्यन (थोड़ा संभलते हुए): "अच्छा जी? तो ज़रा नाम भी बता दीजिए अपना, मेरी इतनी केयर करने वाली मोहतरमा हैं कौन?" अनजान नंबर: "नाम में क्या रखा है आर्यन? बस इतना समझ लो कि मैं वो हूँ, जो आज तुम्हारी ये खामोश नींदें उड़ाने आई है।" आर्यन के होंठों पर एक हल्की सी, शरारती मुस्कान तैर गई। ऑफिस का वो सख्त लड़का अब इस अनजान बातों के खेल में बहने लगा था। उसे इस अजनबी से बात करने में एक अजीब सा सुकून मिल रहा था। आर्यन (फोन पर उंगलियां नचाते हुए): "मेरी नींदें उड़ाना इतना आसान नहीं है। वैसे सुना था मुंबई में लड़कियाँ बहुत फॉरवर्ड होती हैं, आज देख भी लिया। प्रोफाइल पिक तो लगा लो, देखूं तो सही मेरी रातों की नींद चुराने वाली दिखती कैसी है?" अनजान नंबर: "तुम लड़के सच में एक जैसे होते हो आर्यन! 10 मिनट पहले जो लड़का बालकनी में उदास खड़ा था, वो अब एक अनजान लड़की से फ्लर्ट कर रहा है? दुनिया के सामने तो बड़े सीधे और सख्त बनते हो ना तुम?" आर्यन के हाथ ठिठक गए। 'बालकनी में उदास खड़ा था...' इसे कैसे पता? आर्यन ने तेज़ी से बालकनी से नीचे सड़क की तरफ देखा, पर वहाँ कोई नहीं था। उसका दिल अब ज़ोरों से धड़कने लगा। आर्यन: "तुम जो भी हो... छुपकर बात करना बहुत आसान है। सच बता रहा हूँ, अगर तुम अभी मेरे सामने होती ना, तो तुम्हारी इस शरारत का बहुत अच्छे से जवाब देता। फिर देखती आर्यन कितना सीधा है।" फोन की स्क्रीन पर कुछ देर तक सन्नाटा रहा। आर्यन की साँसें अटकी हुई थीं। फिर एक मैसेज आया, जिसने आर्यन के पैरों तले ज़मीन खिसका दी। अनजान नंबर: "अच्छा? सामने होती तो जवाब देते? तो फिर पलट कर देखो मिस्टर आर्यन... तुम्हारी रात के 2 बजे वाली लड़की तुम्हारे ठीक पीछे खड़ी है!" (सीन: हकीकत का सामना) आर्यन का शरीर सुन्न पड़ गया। उसने धीरे से अपना फोन नीचे किया। एक पल के लिए उसे लगा कि वो कोई सपना देख रहा है। उसने कांपती हुई साँसों के साथ पीछे की तरफ गर्दन घुमाई। उसके कमरे का दरवाज़ा जो उसने हल्का सा खुला छोड़ दिया था, वहाँ चौखट पर कोई खड़ा था। कमरे की हल्की पीली रोशनी में... रिया खड़ी थी। उसके एक हाथ में उसका फोन था और आँखों में एक ऐसी शरारत और प्यार का समंदर था, जिसे आर्यन ने पहले कभी नहीं देखा था। रिया आर्यन की ही बिल्डिंग में, सामने वाले फ्लैट में रहती थी, पर रात के 2 बजे वो उसके दरवाज़े पर होगी, ये आर्यन ने सपने में भी नहीं सोचा था। रिया धीरे-धीरे चलकर आर्यन के पास आई। आर्यन बुत बनकर उसे बस देखे जा रहा था। उसकी बोलती बंद हो चुकी थी। रिया ने बिना कुछ कहे अपना हाथ आगे बढ़ाया और आर्यन का कान ज़ोर से पकड़ कर खींच लिया। आर्यन (दर्द और हैरानी से): "आउच! रिया... तुम? यह नंबर..." रिया (गुस्से का नाटक करते हुए, पर आँखों में प्यार लिए): "हाँ, मैं! क्यों? रात के 2 बजे तो बड़े 'जवाब' देने का शौक चढ़ रहा था तुझे? 'सामने होती तो बताता'... ले, आ गई मैं सामने! अब दे जवाब! 10 मिनट नहीं लगे तुझे इस अनजान लड़की पर पिघलने में?" आर्यन अब पूरी बात समझ चुका था। वो रिया की इस हरकत पर झेंप गया था, पर उसके दिल में जैसे हज़ारों फूल एक साथ खिल गए हों। वो जिस लड़की के लिए तड़प रहा था, वो उसकी केयर करने के लिए रात के 2 बजे उसके सामने खड़ी थी। आर्यन (मुस्कुराते हुए, कान छुड़ाते हुए): "तो तुमने ये सब... सिर्फ मुझे चेक करने के लिए किया? या सच में इस सख्त लड़के की रातों की नींद उड़ाने का इरादा था?" रिया का झूठा गुस्सा अब पिघल गया। उसकी आँखों में एक अजीब सी नमी और होंठों पर शर्म आ गई। उसने आर्यन का कॉलर हल्का सा पकड़ा और उसकी आँखों में गहराई से देखते हुए बोली... रिया (धीमी और कांपती आवाज़ में): "नींद तो तुमने मेरी उड़ा रखी है आर्यन... मैं तो बस ये देखने आई थी कि क्या तुम भी रात के 2 बजे मेरी ही तरह जागते हो... या मैं अकेली ही पागल हूँ?" आर्यन ने बिना कुछ कहे रिया के उस हाथ को अपने हाथों में ले लिया। रात के उस सन्नाटे में, उन दोनों के बीच अब कोई पर्दा, कोई मैसेज और कोई 'अनजान नंबर' नहीं था। बस दो धड़कनें थीं, जो एक ही रिदम पर धड़क रही थीं। सुखविंदर की कलम से: "प्यार में कई बार हम वो बातें कह नहीं पाते, जो हमारे दिल में तूफ़ान मचा रही होती हैं। तब एक छोटी सी शरारत, एक 'अनजान मैसेज' हमारे जज़्बातों का पुल बन जाता है। सच कहूँ तो, इश्क़ का असली मज़ा दिन के उजालों में नहीं, बल्कि रात के उन 2 बजे वाले सन्नाटों में है... जब कोई सिर्फ ये पूछने के लिए जाग रहा हो कि 'सो गए क्या?' क्योंकि जो इंसान आपकी नींद की परवाह करता है, वो असल में आपकी रूह से जुड़ चुका होता है।"

