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Sukhwinder Singh Rai

Comedy Inspirational

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Sukhwinder Singh Rai

Comedy Inspirational

ब्रह्मांड का देसी कबाड़ी

ब्रह्मांड का देसी कबाड़ी

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रात के बज रहे थे दो। फाजिल्का के सबसे बड़े कबाड़ गोदाम में एक अजीब सी नीली रोशनी भक-भक कर रही थी। आर्यन पसीने से लथपथ था। उसके सामने पुरानी वाशिंग मशीन, एक टूटे हुए जनरेटर और तांबे की तारों से बनी एक खौफनाक सी मशीन रखी थी। ​पास ही उल्टी बाल्टी पर बैठा उसका जिगरी यार, बंटी, समोसा चबाते हुए बोला, "भाई आर्यन, तूने कबाड़ से यह जो 'टाइम-बम' बनाया है ना, यह पक्का आज हमें मोहल्ले समेत चाँद पर पहुँचाएगा।" ​आर्यन ने पसीना पोंछते हुए एक गहरी सांस ली। उसकी आँखों में एक अजीब सा पागलपन और लालच चमक रहा था। "बंटी मेरे भाई, चाँद पर तो दुनिया जा रही है। तेरा भाई आज सीधा ब्रह्मांड के खजाने में हाथ डालेगा। धरती पर लोहे का भाव 40 रुपये किलो है ना? मैं आज '16 साइकी' नाम के उस एस्टेरॉयड से सीधा सोना और एलियन-लोहा निकालूंगा, जो अंतरिक्ष में लावारिस तैर रहा है!" ​"लावारिस? भाई, ऊपर कोई पुलिस वाला नहीं है क्या?" बंटी ने घबराकर समोसा नीचे रख दिया। ​"अबे चुप कर और देख जादू!" आर्यन ने एक भारी स्विच नीचे गिराया। ​मशीन ने एक भयानक सी 'घुर्र-घुर्र' की आवाज़ की। जनरेटर कांपा और गोदाम के ठीक बीचों-बीच हवा फट गई। वहाँ एक गोल, गहरा काला सुराख (Portal) खुल गया। उस सुराख के उस पार गोदाम की दीवार नहीं, बल्कि हज़ारों चमकते हुए तारे और अनंत अंतरिक्ष का खौफनाक सन्नाटा था। वहां का तापमान इतना ठंडा था कि गोदाम की हवा पल भर में जमने लगी। ​बंटी की आँखें फटी की फटी रह गईं। "बाप रे... आर्यन! तूने तो सच में आसमान में छेद कर दिया बे!" ​आर्यन की लालची आँखें चमक उठीं। उसने कपड़े सुखाने वाले एक लोहे के कांटे को लंबे डंडे में बांधा। "देख बंटी, आज तेरा भाई ब्रह्मांड का सबसे अमीर कबाड़ी बनेगा।" ​आर्यन ने वह डंडा उस काले सुराख के अंदर डाल दिया। सुराख के पार अंतरिक्ष का वैक्यूम (Vacuum) था। कुछ ही सेकंड में डंडे के कांटे में कोई भारी चीज़ फंसी। दोनों ने मिलकर पूरा ज़ोर लगाया और अपनी नसों की पूरी ताकत से उसे बाहर खींचा। ​फर्श पर एक अजीब सी, नीले रंग की एलियन धातु गिरी, जो अंदर से धड़क रही थी। उसकी जादुई चमक से पूरा गोदाम रौशन हो गया। ​"करोड़पति! हम करोड़पति बन गए भाई!" बंटी खुशी से पागल होकर आर्यन के गले लग गया। ​लेकिन तभी कुदरत ने अपना 'बैलेंस' मांग लिया। अंतरिक्ष से कुछ धरती पर आया था, तो वो खाली जगह भरने के लिए ब्रह्मांड ने अपना मुँह खोल दिया। ​अचानक, उस काले सुराख ने एक विशाल वैक्यूम क्लीनर की तरह हवा को अपनी तरफ खींचना शुरू कर दिया। सबसे पहले गोदाम की रद्दी, पुराने अख़बार और बंटी का आधा खाया हुआ समोसा हवा में उड़कर उस सुराख के पार अंतरिक्ष के अंधेरे में गायब हो गए। ​"अरे मेरा समोसा!" बंटी चिल्लाया। ​लेकिन मामला समोसे से बहुत आगे बढ़ चुका था। सुराख की खींच और भयानक हो गई। आर्यन का पुराना कूलर, प्लास्टिक की बाल्टियां और यहाँ तक कि बंटी की चप्पलें भी सुराख निगल गया। ​तभी आर्यन की जान सूख गई। उसका सबसे प्यारा, जान से अज़ीज़ 'बजाज चेतक' स्कूटर, जिसे वो अपनी जान से ज़्यादा चाहता था, ज़मीन से हवा में उठने लगा। ​"ओए नहीं! ओए मेरा स्कूटर! अभी कल ही फुल सर्विस कराई थी इसकी, 200 का तेल डलवाया है!" आर्यन चीखता हुआ स्कूटर का पिछला टायर पकड़ कर लटक गया। ​बंटी ने ज़मीन पर लेटकर आर्यन की टांगें कसकर पकड़ लीं, "छोड़ दे भाई! एलियन चला लेंगे तेरा चेतक, हमें मत मरवा!" ​लेकिन सुराख की ताकत ब्रह्मांडीय थी। स्कूटर आर्यन के हाथों से फिसल कर उस अंधेरे सुराख में हमेशा के लिए समा गया। अब सुराख आर्यन और बंटी को खींच रहा था। मौत बिल्कुल सामने नाच रही थी। ​आर्यन ने अपनी जान बचाने के लिए वही भारी एलियन धातु उठाई और पूरी ताकत से अपनी बनाई उस मशीन के मदरबोर्ड पर दे मारी। ​एक ज़ोरदार धमाका हुआ। भयंकर चिंगारियां उठीं और वह अंतरिक्ष का दरवाज़ा एक दर्दनाक 'फुस्स' की आवाज़ के साथ हमेशा के लिए बंद हो गया। ​गोदाम में अब श्मशान जैसा सन्नाटा था। आर्यन और बंटी फर्श पर औंधे मुंह पड़े बुरी तरह हांफ रहे थे। ​बंटी ने धीरे से सिर उठाया, उसकी एक चप्पल गायब थी। उसने आर्यन को देखा जो अपने खाली, कांपते हाथों को घूर रहा था। ना वो करोड़ों का एलियन लोहा बचा था, ना 15 रुपये किलो की रद्दी, और ना ही उसका प्यारा बजाज चेतक। ​बंटी ने आर्यन के कंधे पर हाथ रखा और रुआंसी आवाज़ में बोला, "भाई... अब ब्रह्मांड के किसी कोने में, कोई एलियन तेरे बजाज चेतक पर बैठकर, मेरा समोसा खाते हुए हॉर्न बजा रहा होगा।" ​आर्यन ने एक ठंडी सांस ली और आसमान की तरफ देखकर हाथ जोड़ लिए, "धरती का कबाड़ ही ठीक है भाई, ऊपर वालों से व्यापार करने में इंसान नंगा हो जाता है।" ​— सुखविंदर की कलम से ​विशेष संदेश: कुदरत के साथ हेराफेरी करने का अंजाम हमेशा भारी पड़ता है। इंसान अपने लालच में सोचता है कि वह शॉर्टकट मारकर या ब्रह्मांड के नियमों को तोड़कर रातों-रात भगवान बन जाएगा। लेकिन याद रखिए, कुदरत का 'तराज़ू' बहुत सटीक होता है। आप लालच में आकर जो मुट्ठी भर चीज़ें चुराने की कोशिश करते हैं, कुदरत उसके बदले में आपसे आपकी सबसे कीमती चीज़ें (और सुकून) छीन लेती है। लालच का अंत हमेशा इंसान को खाली हाथ ही छोड़ता है।


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