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Sukhwinder Singh Rai

Drama Fantasy

4  

Sukhwinder Singh Rai

Drama Fantasy

-शून्य: अंत से अनंत तक

-शून्य: अंत से अनंत तक

4 mins
6

रात के 11:43 बज चुके थे। हवा में एक अजीब सा ठहराव था, जैसे कुदरत ने अपनी सांस रोक ली हो। आसमान का रंग अब वो परिचित नीला या काला नहीं रहा था; वह पिघले हुए तांबे की तरह लाल हो चुका था। हवा में जलते हुए तारों और ओजोन की एक भयानक, दमघोंटू गंध तैर रही थी। ​आर्यन अपनी बालकनी की रेलिंग को पकड़े खामोश खड़ा था। तभी एक अदृश्य झटके ने पूरी दुनिया को सुन्न कर दिया। उसके हाथ में वाइब्रेट कर रहा फोन अचानक एक बेजान पत्थर बन गया। शहर की बत्तियां, आसमान में उड़ते जहाज़, अस्पतालों की लाइफ-सपोर्ट मशीनें... सब कुछ एक मिलीसेकंड में भस्म हो गया। यह सूरज की पहली 'सौर ज्वाला' (Solar Flare) थी, जिसने इंसानी गुरूर की सारी टेक्नोलॉजी को राख कर दिया था। ​नीचे सड़कों पर चीखें गूंज उठीं। लोग पागलों की तरह भाग रहे थे, पर कहाँ? जब आसमान ही मौत उगलने वाला हो, तो कोई छत कैसे बचा सकती है? कोई ईश्वर से प्रार्थना कर रहा था, कोई अपनों को सीने से भींच कर रो रहा था। इंसानियत अपने सबसे गहरे खौफ से गुजर रही थी। ​पर आर्यन की धड़कनें एकदम शांत थीं। वह अपनी सोच में कुदरत का वो पन्ना पढ़ चुका था जिसे वैज्ञानिक आज तक सिर्फ थ्योरी मानते थे। सूरज—अरबों सालों से हमारा पालनहार—आज अपनी उम्र पूरी कर चुका था। एक महा-विस्फोट (Supernova) अब बस कुछ पलों की दूरी पर था। ​अचानक, वो दिल दहला देने वाली चीखें धीमी पड़ने लगीं। आवाज़ नहीं, बल्कि भौतिक विज्ञान के नियम टूट रहे थे। आर्यन को महसूस हुआ कि उसके पैरों के नीचे से ज़मीन का खिंचाव खत्म हो रहा है। बालकनी के गमले, लोहे की ग्रिल, और नीचे सड़कों पर बदहवास भागते लोग... सब धीरे-धीरे हवा में तैरने लगे। धरती का गुरुत्वाकर्षण (Gravity) दम तोड़ चुका था। हम अंतरिक्ष के उस शून्य में समा रहे थे जहाँ कोई भार नहीं होता। ​तभी क्षितिज (Horizon) से एक ऐसी रोशनी फटी जिसने ब्रह्मांड के अंधेरे को चीर कर रख दिया। वह रोशनी इतनी सफ़ेद, इतनी भयानक और इतनी तेज़ थी कि आँखें उसे देखते ही अंधी हो जाएं। आग की एक ऐसी ब्रह्मांडीय सुनामी, जो लाखों किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ़्तार से धरती को निगलने आ रही थी। ​हवा में तैरते हुए आर्यन ने अपने दोनों हाथ खोल दिए और आँखें मूंद लीं। आग की वो महा-लहर उससे टकराई। दर्द का कोई अहसास नहीं हुआ; क्योंकि तंत्रिकाएं (Nerves) दिमाग तक सिग्नल भेजने से पहले ही वाष्प (Vapor) बन चुकी थीं। आर्यन ने महसूस किया कि उसकी त्वचा, उसका खून, उसकी हड्डियां... सब टूट कर छोटे-छोटे, चमकते हुए परमाणुओं (Atoms) में बिखर रहे हैं। धरती, चाँद, इंसान और हमारे सारे अहंकार—सब एक पल में जलकर उस अनंत काले समंदर में राख का बवंडर बन गए थे। ​पर ये मौत नहीं थी। यह तो कुदरत का 'रीसेट बटन' था। अंतरिक्ष के उस सन्नाटे में फैलती हुई वो राख, मरे हुए तारों के मलबे के साथ मिलकर एक नई गुरुत्वाकर्षण 'चुंबक' तैयार कर रही थी। आर्यन के शरीर का हर एक कण अब उस महा-शून्य का हिस्सा था। ​अरबों साल के एक लंबे सन्नाटे के बाद, इसी राख से फिर एक नया 'बिग बैंग' होगा। फिर से एक नया तारा जलेगा, नीले बादल बनेंगे, और शायद... किसी नई धरती पर, कोई नया इंसान आसमान को देखकर यही कहानी फिर से सोचेगा। कुदरत की किताब का बस एक पन्ना पलटा गया था। ​— सुखविंदर की कलम से ​विशेष संदेश: प्रिय पाठकों, यह महज़ एक कहानी नहीं, बल्कि उस अनंत ब्रह्मांडीय चक्र की एक वैज्ञानिक और दार्शनिक कल्पना (Sci-Fi Fiction) है, जिसके सामने हमारा अस्तित्व एक रेत के कण बराबर भी नहीं है। विज्ञान आज भी इस रहस्य को सुलझाने में लगा है कि क्या यह ब्रह्मांड 'बिग बैंग' से शुरू होकर एक महा-विनाश पर खत्म होता है और फिर से नया जन्म लेता है? यह कहानी कुदरत के उसी 'रीसेट चक्र' का एक भावनात्मक चित्रण है। कुदरत के नियम हमारी समझ से बहुत परे हैं; सच तो यह है कि हम सब अंततः तारों की धूल से ही बने हैं, और एक दिन उसी अनंत अंतरिक्ष में विलीन हो जाएंगे।


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