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Kavita Sharrma

Abstract

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Kavita Sharrma

Abstract

राज़

राज़

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 मां ने कहा कि कल ही तो आई हो और आज फिर वापस जा रही, नहीं तुम्हें नहीं जाने दूंगी पूरे महीने के बाद आई हो। मां सुधा को मना कर रहीं थीं। सुधा ने फिर पढ़ाई का बहाना बनाया और अपना बैग उठाया और चल पड़ी। मन में उसने मां से माफ़ी मांगी क्योंकि ये उसके भीतर की बात जो उसने राॕ एजेंट बनते समय ली थी... । वो धीरे से मुस्कुराई और मां से दिल में माफ़ी मांगी। 


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