STORYMIRROR

Hardik Mahajan Hardik

Romance

3  

Hardik Mahajan Hardik

Romance

राधा कृष्ण

राधा कृष्ण

1 min
418

राधा:/ आकुल है मन तेरे रोम-रोम में निर्भर करता तेरे व्योम योम में सामर्थ मेरे जीवन का अतुलनीय निर्लभ।

कृष्ण:/ कल्पनाओं से भरी ऊर्जा प्रेम की यह कहानी है अनमोल निरन्तर दृश्यों से भरी रहेगी तू है राधिका कान्हा की प्यारी।

राधा:/ उत्पन्न करता तेरा अनुभव तू कृष्ण मुरारी मेरा नन्दलाल है निर्वाह विपरीत तेरे सामर्थ जीवन का तू मेरे कान्हा।

कृष्ण:/ विपरीत परिस्थितियों से निकलकर आगे स्वर्णिम निर्वाह करना वृन्दावन के इर्दगिर्द चारों औऱ यह कृष्ण तुझें पुकारे। मुरलीधर नन्दलाल तेरो तुझे बुलावे।


Rate this content
Log in

Similar hindi story from Romance