प्यार के दो रंग (भाग २)
प्यार के दो रंग (भाग २)
राजीव के साथ होटल की सीढ़ियां चढ़ते हुए उसे राजीव के पिता द्वारा डॉक्टर सिंघल के प्रतिष्ठित चंदन हॉस्पिटल में नौकरी लगवा देने की ही बात उसके दिमाग में घूम रही थी वह अच्छी तरह समझ रही थी की इतने बड़े अस्पताल में काम करने के बाद उसकी जिंदगी संवर जाएगी। इसीलिए उसके मन में डॉक्टर राजीव और उसके पिता के प्रति कृतज्ञता के भाव आ रहे थे।
होटल के कमरे के अंदर जाने के बाद उसने राजीव से कृतज्ञता पूर्वक कहा
"थैंक यू डॉक्टर राजीव !!आपने मेरी जिंदगी की एक सबसे बड़ी प्रॉब्लम आसान कर दी। मुझे नौकरी की बहुत सख्त जरूरत थी। तुमने इतने बड़े अस्पताल में मुझे अच्छी वेतन वाली नौकरी दिलवा कर मुझे ऑब्लाइज कर दिया है।"
"आप कैसी बात करती है!! एक कलीग होने के नाते मेरा इतना तो फर्ज बनता ही है, कि मैं यथासंभव आपने साथी की मदद करूं!! और वही मैंने किया है। यदि आपको शुक्रिया अदा करना है तो इसी बात पर चलिए,मुझे एक कप चाय और पिला दीजिए।"मुस्कुराते हुए राजीव बोले।
" हां हां !!क्यों नहीं। पर मेरी इच्छा है कि आप आज का डिनर मेरे साथ यही होटल में करें" कहते हुए डॉक्टर अंजलि ने राजीव की आंखों में झांका।
"यह तो मेरे लिए सौभाग्य होगा कि अपनी एक प्यारी सी फ्रेंड के साथ इस हंसी शाम को वक्त गुजरने का सुनहरा मौका मिलेगा।" कहते हुए राजीव मुस्कुरा दिए।
रात को डिनर करते हुए रात गहरी हो चुकी थी। राजीव ने कल के लिए जयपुर भ्रमण का प्रोग्राम फिक्स कर लिया जिसको अंजलि ने स्वीकार भी कर लिया था।
राजीव अंजलि को उसके कमरे तक छोड़ने गए। कमरे में पहुंचते ही अंजलि का सेंडिल कारपेट में उलझ गया और वह धड़ाम से नीचे जा गिरी।
राजीव ने तुरंत आगे बढ़कर उसे अपनी बाहों का सहारा देकर उठाकर पलंग पर लेटा दिया। ऐसा करते समय लता सी लहराती हुई अंजलि का सारा बदन उनके शरीर से लिपट गया। अंजलि के गर्म शरीर और उत्तंग बक्ष स्थल डॉक्टर राजीव के सीने से लगकर एक विद्युत तरंग का सा झटका दे रहे थे।
पलंग पर लिटाते हुए डॉक्टर राजीव ने देखा कि अंजलि ने शायद शर्म से और दर्द के कारण आंख बंद कर ली थी।
ना मालूम क्या सोचकर बेखुदी में ही डॉक्टर राजीव के होंठ अंजलि के माथे पर जा पहुंचे। अंजलि के माथे पर चुंबन अंकित करने के बाद जब अंजलि की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई और उसने जब आंखें बंद ही रखीं, तो ,भावनाओं के ज्वार में डॉ राजीव के अधर होले से बढ़कर अंजलि के अधरों से जा मिले।
यह शायद कृतज्ञता थी या उम्र का तकाजा कि डॉक्टर अंजलि के हाथ अपने आप बढ़कर राजीव के गले के चारों और लिपट गए और उसने उनके चुंबन का प्रति उत्तर बहुत गर्म जोशी के साथ दे दिया।
बिना एक शब्द बोले डॉ राजीव अंजलि के साथ पलंग पर ही लेट गए और उन दोनों की प्रेम कीड़ा बहुत तेजी के साथ अपनी मंजिल की तरफ चल पड़ी। कब उनके शरीर से कपड़े निकाल कर एक तरफ जा पड़े जोश में उन्हें पता ही नहीं चला।
1 घंटे बाद जब उन दोनों का भावनाओं का ज्वार उतर गया ,तो डॉक्टर राजीव अंजलि से गुड नाइट कह कर अपने घर चले गए।
सुबह लगभग 7:00 बजे राजीव अपनी कर के साथ फिर से होटल में मौजूद थे। डॉक्टर अंजली अपने जीवन के प्रथम सहवास के बाद अनुरक्त भाव से डॉ राजीव का इंतजार कर रही थी। राजीव ने कमरे में आकर अंजलि को फिर से अपनी बाहों में ले लिया और पूर्ण समर्पण के साथ अंजलि उनकी बाहों में मोम की तरह पिघलती चली गई।
इसके बाद अंजलि और राजीव जयपुर पैलेस देखते हुए अन्य स्थलों पर भ्रमण करते रहे। डॉक्टर अंजली को ऐसा महसूस हो रहा था जैसे वह राजीव के साथ हनीमून पर आई हो।
जयपुर भ्रमण के दौरान अपने आसपास के लोगों की चिंता ना करते हुए वह नव प्रेमी युगल आपने प्यार की रंगीन बातों में खोए हुए खोए हुए सारे दर्शनीय स्थलों को देखते रहे और होटल लौट के आने के बाद उनका प्यार फिर उन्हें बिस्तर पर एक साथ ले आया।
प्यार के अनंत सागर में एक बार फिर डूबने के बाद राजीव अंजलि के होठों पर चुंबन करके अपने घर चले आए।
अगले दिन डॉक्टर अंजली को वापस भोपाल जाना था। अंजलि बेमन से ट्रेन में बैठकर भोपाल चली आई।
भोपाल आने के बाद अंजलि हमेशा अपने प्रथम प्रेम और प्रथम समर्पण की यादों में खोई रहती थी। उसके सपने में हर रोज डॉक्टर राजीव आकर उसके साथ प्रणय क्रीड़ा किया करते थे कभी वह उनकी बाहों में पिघलती सी जाती थी तो कभी आगे बढ़कर कई बार राजीव को अपनी तरफ से प्यार की ऊंचाइयों तक छेड़खानी करते हुए ले जाती थी।
अंजलि के जाने के बाद राजीव अपनी पुरानी जिंदगी में रम गए थे। उनकी अनेक महिला मित्र थी जिनके साथ उनकी हर शाम अक्सर रंगीन हुआ करती थी। उन्हें अब अब सामान्य शक्ल सूरत वाली डॉ अंजलि कम ही याद आती थी। हां उन्हें इस बात की आवश्य प्रसन्नता थी की डॉ अंजलि का कौमार्य पहली बार उन्हें ही प्राप्त हुआ था जो अन्य किसी महिला से नहीं हुआ था। शायद यही बात उन्हें कभी-कभी अंजलि की तरफ आकर्षित कर देती थी।
अंजलि अक्सर अपनी तरफ से ही उन्हें फोन किया करती थी पर कभी कभार को छोड़कर डॉ राजीव उसके फोन को अटेंड ही नहीं करते थे।
डॉ अंजलि को लगता था कि अपने व्यवसाय में अत्यधिक व्यस्त रहने के कारण शायद राजीव इसकी अनदेखी करते रहते हैं।
इस बार शनिवार इतवार के साथ सोमवार को गुरु रविदास जी की जयंती थी। इस कारण 3 दिन की छुट्टियां आ गई थी। डॉक्टर अंजलि ने अचानक ही अपना प्लान जयपुर जाने का बना लिया और डॉक्टर राजीव को बिना बताए ही वह जयपुर जा पहुंची।
प्रकृति का भी कभी-कभी कितना अजीब संयोग होता है कि अंजलि जिस होटल में पहले रुकी थी उसी में उसे एक रूम मिल गया। वह शाम को अपने रूम से बाहर निकली तभी उसे होटल के कोने वाले रूम में डॉ राजीव एक सुंदर सी लड़की के साथ कमरे के अंदर जाते दिखाई दिए लड़की डॉक्टर राजीव की बाहों में बेकरारी के साथ लिपटी हुई थी जिससे स्पष्ट पता चल रहा था कि वह रूम में किस लिए जा रहे हैं।
डॉ अंजलि पर तो मानो वज्रपात ही हो गया। काफी देर तक इंतजार करने के बाद वह दबे पांव चलती हुई रूम के दरवाजे तक जा पहुंची और उसने
की होल से अंदर का नजारा देखा। सामने बिस्तर पर डॉक्टर राजीव उस लड़की के साथ बिना कपड़ों के नग्न अवस्था में रतिक्रिया में संलग्न थे।
अब अंजलि को पूरा विश्वास हो गया की नौकरी दिलाने के नाम पर राजीव उसे जानबूझकर जयपुर लाए थे और उसे अपने जाल में फंसा कर उसका कौमार्य भंग कर दिया था। अपने जीवन को इस तरह बर्बाद होते हुए देखकर माता-पिता विहीन डॉक्टर अंजली का मन शीशे के बर्तन की तरह नीचे गिर का चकनाचूर हो गया।
कुछ समय तक वह किंकर्तव्यबिमूढ होकर बिस्तर पर अनमनी सी लेटी रही। फिर उसने यह निर्णय लिया की जो भी हो अब राजीव को उससे विवाह करना ही पड़ेगा। इसके लिए उससे जो भी बन सकेगा वह अवश्य करेगी। यही सोच कर अगले दिन सुबह वह डॉक्टर राजीव के घर जा पहुंची। उसे देखकर डा राजीव आश्चर्य चकित हो गए। उन्होंने कहा !
"अरे डॉक्टर अंजली बिना बताए जयपुर आ पहुंची। "
डॉ अंजलि सपाट लहजे में बोली।
"मैं रात को ही जयपुर आ गई थी। और और होटल अमल में ही रात को रुकी थी! तभी रात को 10:30 बजे के लगभग मैंने तुम्हे भी कोने वाले कमरे में किसी लड़की के साथ जाते हुए देखा था। "
यह सुनकर डॉ राजीव के चेहरे का रंग उड़ गया। उन्हें यह स्पष्ट हो गया था की डॉक्टर अंजलि ने उसे उसकी नई प्रेमिका के साथ होटल के कमरे में रंगरेलियां मनाते हुए देख लिया था।
डॉक्टर अंजली सीधे से अपने पॉइंट पर आ गई और बोली "डॉ राजीव अब मुझे यह बताइए कि अब हम लोग शादी कब कर रहे हैं।"
अंजलि के मुंह से शादी की बात सुनकर डॉ राजीव अचकचा गए। निश्चित तौर पर वह अंजलि जैसी साधारण शक्ल सूरत की और मध्यम वर्गीय कन्या से विवाह करने के उत्सुक नहीं थे। उनके पापा उसके दूसरे विवाह के लिए एक बड़े डॉक्टर की बेटी का प्रस्ताव पहले ही ला चुके थे और उस पर डॉ राजीव की भी सहमति हो चुकी थी।
कुछ सोच विचार के बाद राजीव ने कहा।
" देखो डॉक्टर अंजली! तुम पढ़ी-लिखी और समझदार लड़की हो!!! तुम अच्छी तरह जानती हो कि हम दोनों का सामाजिक , स्तर अलग-अलग है और हम लोगों के बीच शारीरिक संबंध भले ही बन चुका हो, पर हमारा विवाह होना संभव ही नहीं है। हां अगर तुम चाहो तो तुम्हारी कुछ आर्थिक मदद मैं अवश्य कर दूंगा। पर प्लीज विवाह की बात मत करना। "
"बहुत खूब। किसी डॉक्टर के कौमार्य की कीमत चंद रुपए ही हो सकती है आपकी निगाह में"कहकर डॉक्टर अंजलि के चेहरे पर दर्द भरी मुस्कान उभर आई।
"इसे तुम जैसे भी समझो,वही ठीक है"
कहते हुए डॉक्टर राजीव उसे ड्राइंग रूम में ही छोड़कर, अपना बैग लेकर तेजी से अपनी कार की तरफ चले गए।
अपने साथ हुए इस तरह के धोखे को डॉक्टर अंजली सहन नहीं कर पाई। अपमान और वितृष्णा से भरी हुई अंजलि का क्रोध सातवे आसमान पर जा पहुंचा।
उसने अपना पर्स उठाया और राजीव के पीछे-पीछे दौड़ पड़ी।
चीखते हुए उसने कहा।
" डॉक्टर राजीव आपने जो किया है उसका फल अब आपको भोगना हीं पड़ेगा।अपने इस दुष्कर्म के लिए निश्चित तौर पर सजा के पात्र हो।"
डॉ राजीव उसकी बात को अनसुना करते हुए। अपनी कार में बैठकर घर से बाहर चले गए।
डॉ अंजलि सीधी पुलिस थाने जा पहुंची और वहां जाकर उसने डॉक्टर राजीव की, विवाह का वादा करके उसके शारीरिक शोषण की शिकायत थाने में दर्ज कर दी। उसने शिकायत में लिखा कि अब डॉक्टर राजीव उससे विवाह करने में आनाकानी कर रहे हैं।
क्योंकि यह मामला अत्यंत हाई प्रोफाइल था इसलिए पहले तो इंस्पेक्टर ने रिपोर्ट दर्ज करने में आनाकानी की।
पर जब डॉक्टर अंजलि ने सीधा आई जी पुलिस को फोन लगा दिया तो आईजी की फटकर से विवश होकर इंस्पेक्टर को उसकी रिपोर्ट लिखना ही पड़ी।
सबूत के तौर पर डॉक्टर अंजलि ने होटल के सीसीटीवी कैमरे की वीडियो रिकॉर्डिंग जिसमें डॉक्टर राजीव उसके कमरे में रात को आकर रुके थे तथा अपने जयपुर से भोपाल जाने वाले उसके टिकट का ब्योरा दिया। यह टिकट वही था जिसे डॉक्टर राजीव ने अपने अकाउंट से बुक कराया था।
इसके अलावा डॉक्टर अंजलि के अंतर्वस्त्र जिस पर राजीव के सीमेंस के धब्बे थे जिसे प्यार की पहली निशानी समझकर उसने अपने बॉक्स में बड़े प्यार से रख रखा था। उसको भी उसने सबूत के तौर पर पेश कर दिया।
डॉ राजीव की गिरफ्तारी हो गई। बड़ी मुश्किल से किसी तरह उसके पिता ने जुगाड़ लगाकर डॉक्टर राजीव की जमानत करवाई। पर इस सब में भी काफी समय लग गया और लगभग डेढ़ महीने तक डॉ राजीव को जेल में ही रहना पड़ा।
क्योंकि सीमेंस( बिर्य)का जो डीएनए टेस्ट शासकीय लेब होना था, वह एक डॉक्टर का केस था और अंजलि अच्छी तरह जानती थी की जब भी सैंपल लैब में भेजा जाएगा, वहां पर यह सैंपल रिश्वत देकर चेंज हो सकता है। इसलिए उसने अपने अंतर वस्त्र का केवल एक टुकड़ा ही सैंपल को भेजा था और बाकी का अपने पास रख रखा था। यही बात उसने उसे लैब के उस डॉक्टर को बता दी थी, जहां पर डीएनए का टेस्ट होना था।
अब लेब के उस डॉक्टर के पास और कोई उपाय नहीं रह गया था सिवाय इसके कि वह सच्ची डीएनए रिपोर्ट दे। डॉ अंजलि ने ने अपने पद का प्रयोग करते हुए लेब पर जल्दी रिपोर्ट जमा करने का पूरा दबाव बनाया। परिणाम यह हुआ कि 4 महीने के बाद रिपोर्ट कोर्ट के पास जा पहुंची।
डॉ राजीव के वकील ने स्पष्ट तौर पर डॉ राजीव को और उनके पिता को सलाह दी की और डॉक्टर राजीव को निश्चित तौर पर सजा हो जाएगी इसलिए अच्छा यही है की राजीनामा कर लिया जाए।
डॉ राजीव के पिता डॉ अंजलि के पास जा पहुंचे। उन्होंने उसे लगभग एक करोड़ का एक मकान भोपाल में ही देने का प्रस्ताव उसके सामने रख दिया।
पर डॉक्टर अंजली डॉ राजीव से विवाह के लिए ही अड़ी रहीं।
विवश होकर,अंत में डॉ राजीव और उनके पिता इस विवाह के लिए तैयार हो गए और एक सादे समारोह में वह दोनों विवाह के बंधन में बंध गए।
शेष कहानी अगले भाग में।

