मन का मैल
मन का मैल
अवधेश प्रताप सिंह को सभी लोग मध्य प्रदेश शासन के इस सरकारी ऑफिस में ए पी के नाम से बुलाते थे ।40 वर्षीय ए पी दिखने में बहुत ही स्मार्ट और हद दर्जे का धूर्त व्यक्ति था। ऊपर से दिखने में सोने सा और बोलने में शहद सा मीठा । उसके पास अपने काम करवाने के लिए लोगों की लाइन लगी रहती थी पर वह व्यक्ति कभी भी किसी काम को बिना रिश्वत लिए नहीं करता था। उसे इतनी ज्यादा रिश्वत मिल जाती थी की उसे कभी अपनी तनख्वाह में हाथ लगाने की भी जरूरत नहीं पड़ती थी। अवधेश जी की पत्नी का नाम प्रिया था अवधेश जी उसे जी जान से प्यार करते थे उनका बेटा शुभम कक्षा 5 का स्टूडेंट है। सब कुछ बहुत ही अच्छा अच्छा चल रहा था पैसे की कोई कमी थी नहीं जिंदगी बहुत मजे में गुजर रही थी । कहते हैं कि जब भी रिश्वत आती है तो व्यक्ति के पतन का भी मार्ग शुरू हो जाता है। अचानक ही एक दिन अवधेश जी की पत्नी प्रिया को तेज बुखार आया और वह चक्कर खाकर गिर पड़ी। बुखार तो से पहले भी कई बार आता रहता था पर चक्कर खाकर वह आज पहली बार गिरी थी। अवधेश जी तुरंत अपनी पत्नी को लेकर डॉक्टर के पास पहुंचे। डॉक्टर ने कुछ टेस्ट लिख दिए। जब टेस्ट की रिपोर्ट आई तो पता चला की प्रिया को ब्लड कैंसर है। अब इलाज का सिलसिला चल निकला ।अपनी पत्नी को बचाने के लिए अवधेश प्रताप सिंह जी ने महंगे से महंगा इलाज करवाया। इससे उनकी पत्नी की उम्र तो थोड़ी ज्यादा बढ़ गई ,पर इलाज में,धीरे-धीरे करके उनके सारे पैसे खर्च होते चले गए ।जो कुछ थोड़ा बहुत मध्य प्रदेश शासन से अपने कर्मचारियों को मिल सकता है, वह पैसा ही उन्हें मिल पाता था ।पर खर्च बहुत ज्यादा हो रहा था इसी तरीके से लगभग ढाई साल गुजर गया। इस बीच अवधेश प्रताप सिंह जी के ऊपर रिश्वत के पैसे खाने के बावजूद भी बड़ा भारी कर्ज हो गया और वह पैसे - पैसे को मोहताज हो गए। एक दिन प्रिया को बड़ी बेचैनी हो रही थी। डॉक्टर ने एक बहुत महंगा इंजेक्शन लगवाने के लिए लिखा। अवधेश प्रताप जी के पास इंजेक्शन खरीदने के लिए₹20000 भी नहीं थे उन्होंने एक फाइल जो बोगस पेमेंट की थी, उसे पास करने के लिए₹40000 की रिश्वत मांगी। जिसका सौदा किसी तरीके से 30000 रुपए में फाइनल हो गया। इन पैसों से उन्होंने वह इंजेक्शन बुलवा लिया ।इंजेक्शन को लगवाते ही प्रिया की तबीयत ओर भी खराब हो गई। उसकी सांस उखड़ने लगी और एक हिचकी लेकर उनकी पत्नी प्रिया स्वर्गवासी हो गई।। आज पहली बार अवधेश प्रताप जी को रिश्वत के पैसे से खरीदे गए इंजेक्शन और दबा के दुष्प्रभाव को देखकर रिश्वत के पैसे से नफरत हो गई।
