प्रायश्चित
प्रायश्चित
डोरबेल की आवाज सुनकर लता ने दरवाजा खोला सामने उसका पति सुनील सिर झुकाए खड़ा था। वह बोला
"लता प्लीज मुझे माफ कर दो और अपने घर लौट चलो तुम्हें और अपनी बेटियों को घर से निकालकर मैने जो गुनाह किया था मै उसका प्रायश्चित करना चाहता हूँ ।"
लता ने अविश्वास से उसे देखते हुए कहा
"आपको यहाँ प्रायश्चित का भाव नहीं लाया है बल्कि आपका स्वार्थ लाया है।"
लता की बात सुनकर सुनील चौंक उठा और कांपते हुए स्वर में बोला
"स्वार्थ कैसा स्वार्थ?"
लता बोली
"आपने मेरे द्वारा तीन बेटियों को जन्म देने के बाद मुझे घर से निकाल दिया और दूसरा विवाह कर लिया दूसरी पत्नी से आपको पुत्र रत्न की प्राप्ति तो हुई पर पुत्र को जन्म देने के बाद आपकी पत्नी गंभीर रूप से बीमार है और आपके बेटे तथा आपकी गृहस्थी को सँभाल नहीं सकती इसिलिए आप मुझे लेने आये है न।"
सुनील आवाक सा लता का चेहरा देखने लगा ।लता ने कहा
"लौट जाईये आपको प्रायश्चित का अवसर देकर मैं स्वयं का अपमान करना नहीं चाह्ती।"
