Nisha Singh

Drama


4.7  

Nisha Singh

Drama


पंछी

पंछी

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चेप्टर -6 भाग-2

‘कैसा प्लान?’ अंशिका ने अपनी कॉफी का आखिरी एक घूंट पीते हुए पूछा।

‘तू तो रहने ही दे, अवनी… तू बता तेरा क्या प्लान है?’

‘कुछ खास नहीं बस… कॉफी खत्म हो गई है अब नाश्ता निपटाती हूँ…’

मेरा जवाब सुनकर पिया ऐसे खिसिया गई जैसे मैंने जानबूझकर उसे ऐसा जवाब दिया हो। वैसे जानबूझ कर ही दिया था, मज़े लेने के लिए…

‘मैं हमारे करियर की बात कर रही हूँ, आगे क्या करना है, कुछ सोचा भी है या नहीं?’ पिया ने मेरी तरफ मिसमिसाते हुए कहा।

‘इतनी बोरिंग बातें करने वाले हैं हम आज…’ अंशिका की तो जैसे नानी मर गई ये बात सुनकर।

‘बहुत जरूरी है ये बात करना…’ कहते हुए पिया उठ कर खड़ी हो गई और टहल-टहल के हम दोनों को स्पीच देने लगी, रानी लक्ष्मीबाई जैसा फील आ रहा था। जैसे हमें अंग्रेंजो से लड़ने जाना है और वही प्लान चल रहा है।

‘देखो…’ पिया ने अपनी बात आगे बढ़ाई।

‘हम अभी तो थर्ड सेम में है, अब हमें लाइफ में सीरियस हो जाना चाहिए। हमें आगे क्या करना है… किस फील्ड में आगे जाना है कम से कम सोचना तो शुरु कर ही देना चाहिए। अगर हम ही आगे नहीं बढ़ेंगे तो हमारी कोई वेल्यू नहीं होगी कोई हमारी इज्जत नहीं करेगा। कॉलेज के मस्ती मजाक तो कॉलेज में ही रह जाने हैं, जब असली दुनिया से हमारा सामना होगा तो हमारे पास कुछ ऐसा होना चाहिए कि हम दुनिया के कदम से कदम मिलाकर चल सके। ’

ऐसी बातें मुझे जरा… क्या कहूँ, ऐसा लगता है जैसे कुछ चुभ सा गया हो। पिया की बातें सुनकर मेरा चेहरा उतर गया। सारी पुरानी बातें याद आने लगी। मेरा IIT का सपना, मेरे आगे के प्लांस, पेरेंट्स का पहले सपोर्ट करना और बाद में मेरे सपने तोड़ देना, मेरा अकेले रह जाना… सब याद आ रहा था सब कुछ… मेरी उदासी समझते पिया को देर ना लगी।  

‘तू उदास मत हो यार, मैंने तुझे हर्ट करने के लिए नहीं कहा था। ’ कहते हुए पिया ने अपना हाथ मेरे कंधे पर रख दिया। जवाब में मैं मुस्कुरा दी पर वह मुस्कान सिर्फ दिखावे की थी।

‘अरे यार… हम कर भी क्या सकते हैं। ’ अंशिका ने थोड़ा नाउम्मीद होते हुए कहा ‘फिजिक्स में मेरा तो कोई इंटरेस्ट नहीं है, पापा ने जबरन एडमिशन करा दिया तो पढ़ना पढ़ रहा है। मैं तो कुछ नहीं कर पाऊंगी। ’

'नहीं यार ऐसा कुछ नहीं है हमें उम्मीद का दामन नहीं छोड़ना चाहिए कोई जरुरी थोड़े ही है कि तू फिजिक्स में अपना करियर बनाए और भी तो ऑप्शन है उनको देख…। ’

ठीक ही तो कह रही है पिया। पिया की इस बात से मुझे थोड़ी राहत सी मिली। मुझे भी लगता था अब साइंस पढ़ने में मेरा भी मन नहीं लगता है। दूसरे ऑप्शन के बारे में मैं भी तो सोच सकती हूँ। कुछ समझ में नहीं आता था कि क्या करूँ पर आज पिया की बात से एक उम्मीद की किरण की जाग रही है। ज़िंदगी को एक नए नज़रिए से देखने का मन कर रहा है।

‘और तू अवनी… तू भी कुछ सोच यार । ’ पिया की बात से मेरा ध्यान टूटा।

‘मैं… क्या बताऊं यार, तू तो सब जानती है। मेरा मन अब पढ़ने में नहीं लगता क्या करूँ समझ में नहीं आता। तू करियर बनाने की बात कर रही है मैंने तो इसके बारे में सोचना ही छोड़ दिया है। ’ कहते-कहते मेरी आंखों में आंसू छलक आए। मेरी सहेलियां बहुत अच्छी है दोनों ने मिलकर मुझे गले लगा लिया। गले लगाया तो मुझे कंसोल करने के लिए था पर उनका प्यार अपने लिए देखकर मेरे आंसू और जोर से बह निकले।

‘अरे… तू रो मत यार सब अच्छा ही होगा, टेंशन मत ले, हम हैं ना तेरे साथ…’ अंशिका ने कहा तो जहां मैं रो रही थी मुझे हंसी आ गई कि खुद का तो कुछ पता नहीं है मुझे समझा रही है। वह भी समझ गई कि मैं उसी पर हंस रही हूँ। जहाँ मुझे गले लगाया था वहाँ उसने मेरा गला 

दबा दिया और मारने की धमकी देने लगी गमगीन हुआ माहौल एकदम से खुशनुमा हो गया।

‘अच्छा चलो एक काम करते हैं…’ पिया ने अब थोड़ा सीरियस होकर कहा। हम दोनों अब पिया की तरफ देखने लगे और उसकी स्पीच जारी थी… ‘आज शनिवार है हम सोमवार को कोचिंग पर मिलते हैं। वहां इसी बारे में बात करेंगे तब तक सोच लेते हैं कि हमें अपनी लाइफ में क्या करना है। ’

‘पर यार, हम कैसे एकदम से डिसाइड करें कि क्या करना है?’ अंशिका अभी तक नाउम्मीद थी।

‘अरे तू कंफ्यूज मत हो, बस हम इतना सोचते हैं कि हमें क्या करना अच्छा लगता है हम उसी फील्ड में आगे बढ़ेंगे। ’ पिया ने उसे समझाया तो इस बार उसकी बंद पड़ी बत्ती जली।

‘हाँ यार तू सही कह रही है, ऐसा ही करते हैं। ’

जवाब काफी पॉजिटिव था उसका, लगा मुझे अब तो हमारी मोटी कुछ सोचने की जहमत उठाएगी।

थोड़ी देर बाद वो दोनों चली गई मैं काफी खुश थी। बहुत हल्कापन महसूस कर रही थी मेरा सपने टूटने का गम आंसुओं में बह चुका था और एक नई लौ जलने की तैयारी में थी।  


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