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Tanha Shayar Hu Yash

Inspirational Tragedy

2.5  

Tanha Shayar Hu Yash

Inspirational Tragedy

पिली

पिली

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एक सखी दूसरी सखी से-

नीली : सुनो तुम कभी शहर गई हो।

पिली : नहीं क्यों ! आज तुझे शहर जाने की क्या सूझी।

नीली : अरे वो है ना जो दूसरी और रहते हैं।

सखी पिली : हाँ क्या हुआ उन्हें।

नीली : हुआ कुछ नहीं, वो शहर गए, सुना है वहीं के होकर रह गए। सुना है वहाँ बाहर हर तरफ खाने के भंडार है, रात भी दिन जैसे हैं, खूब मौज ले रहे है दोनों वहाँ।

पिली : अच्छा ! पर शहर तो बहुत दूर है।

नीली : हाँ दूर का सफर किया तभी तो सुखी हो गए वहाँ जाकर। सुना है वहाँ जो भी जाये वहीं का होकर रह जाता है।

पिली : कितने दिन का सफर है।

नीली : चार पाँच दी का होगा।

( पिली के मन में शहर की लालसा लगा गई उसकी नीली दोस्त। जिस दिन से वो शहर की तारीफ करके गई वो भी शहर के सपने देखने लगी। और मन ही मन शहर जाने का निर्णय कर लिया। एक दिन पिली अपने पति से।)

पिली : जी सुनते हो क्या ? देखों अब तो सभी शहर की तरफ जाने लगे है मुझे लगता है हमें भी शहर के बारे में सोचना चाहिए।

पति : ना जी ना मेरे विचार से तो तुम शहर का सपना देखना छोड़ दो, वहाँ जो भी गया वापस नहीं आया पता नहीं क्या माया है वहाँ। क्या पता कोई जादू टोना हो।

(पिली नाराज़ होते हुए)

पिली : क्या तुम मुझसे इतना भी प्यार नहीं करते की मेरी एक बात मान कर एक बार शहर चल पड़ो। देखों शहर से हम बहुत सारा अनाज ले आएंगे चावल भी। मैंने कब कहा की हम वहीं रह जायेंगे।

पति : प्यार तो मैं तुमसे बहुत करता हूँ पर इसका मतलब ये नहीं की मैं तुम्हारी बेतुकी बातें मानने लगूँ। हमारे पास जितना है बहुत है तुम उसी में गुज़ारा करना सिखों। शहर जाकर लोग अपने बच्चो तक को भूल जाते हैं और वैसे भी मुझे ये हरा भरा गांव ही पसंद है।

( पिली का पति कहकर अपने काम से निकल पड़ा। इधर पिली का मुँह नाराज़गी से तमतमा गया। पिली ने सोच लिया था की कैसे भी पति को मना कर एक बार शहर तो जरूर जाना है। सारी रात पिली पति से ऐसे ही नाराज़ रही, न खाना ठीक से दिया और न बच्चों से ठीक से बात की। अगली सुबह )

पिली : ये लो आज केवल गेंहू है, चावल खत्म हो गए।

पति : कल तो लाया था चावल इतनी जल्दी खत्म कैसे हो गए।

पिली : तुम्हारे बच्चे चावल के शौकीन है और उम्र के अपने दोस्तों को भी ले आये थे तो सब चट हो गया।

(पिली का पति समझ गया था की जब तक ये शहर नहीं जाएगी तब तक अब घर और रसोई का संचालन ठीक से नहीं होगा। अगली सुबह)

पति : ये देखों कल रात में बाजरा लाया था आज सब बाजरा खाएंगे।

(पर पत्नी पर तो शहर का भुत सवार था सो उसे कुछ अच्छा लगाना नहीं था । पिली मुँह बनाकर ही बैठी रही थक हार कर पति)

पति : चलों पहले बाजरा खा लो फिर कल शहर जाने की भी तैयारी करनी है।

(सुनते ही जैसे पिली की तो भूख ही जाग उठी बड़ी ख़ुशी से सबके लिए खाना परोसा फिर खुद खाने पर बैठ कर बोली)

पिली : आपने सच कहा ना, आप कितने अच्छे है मेरी सब बात मान लेते हैं।

पति : अब पहले खाना खा लो फिर कल शहर चलेंगे पर हम वहाँ दो दिन से ज्यदाा नहीं रुकेंगे।

(बस फिर ख़ुशी ख़ुशी पिली कल के सपनों में खो गई और सुबह होते ही चल पड़े शहर की और उससे पहले बच्चों की जिम्मेदारी नीली को दे दी ताकि दो दिन तक वो उनका ख्याल रख सके। दोनों पति पत्नी बातें करते करते शहर जा पहुँचे )

शहर जाने के बाद दोनों ही बहुत खुश हुए, दोनों ने देखा की शहर में बहुत ऊँची ऊँची इमारतें है, रोड़ एकदम साफ़ सुथरे आसमान से भी देखों तो सब साफ़ नज़र आता था पर आधे दिन ख़त्म होते होते गर्मी बहुत बढ़ गई दोनों को बहुत प्यास लगने लगी और भूख भी। थोड़ी ही देर में दोनों का दम घुटने लगा लगा क्योकि ये दोनों गांव के रहन सहन के आदि थे अब धीरे-धीरे पिली की समझ आने लगा था क्योंकि खाने की तलाश में जब दोनों सारा शहर भटक रहे थे तो बहुत सी जगह पर खाना मिला, पानी मिला पर वो इनके गले से नहीं उतरा। ऊपर से जैसे जैसे साँझ होती जा रही थी वैसे-वैसे प्रदुषण से इनका दम घुटने लगा था जो शहर पिली को बहुत सुहाना लग रहा था अब वो इनकी जान का दुश्मन बन गया था, हर तरफ शोर से इनके कान फटने को हो गए। तभी अचनाक पिली और उसके पति प्यास के मारे उड़ते-उड़ते आसमान से ही बेहोश होकर ज़मीं पर आ गिरे। जी हाँ ये दोनों दो पक्षी थे जो शहर में साँस नहीं ले पाए। जब दोनों को होश आया तो पिली ने पति से माफ़ी माँगी और गांव जाने को कहा।

दोनों ने जैसे तैसे खुद को सम्भाला और गांव की और चल पड़े। रास्ते में ही उन्होंने देखा की जो एक जोड़ा कहीं नाली के किनारे मरे हुए थे, एक के मुँह में पलास्टिक का टुकड़ा था तो दूसरे के मुँह मैं चिंगम।


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