पहला पहला प्यार या महज आकर्षण
पहला पहला प्यार या महज आकर्षण
वह पढ़ने में बहुत अच्छी थी। घर का वातावरण भी पढ़ने के लिए अनुकूल था। बचपन से ही पढ़ने के प्रति बहुत लगाव होने के कारण सब कहते थे यह तो डॉक्टर बनेगी।
तो बचपन से उसके मन में भी एक ख्वाहिश थी की डॉक्टर बनना है और डॉक्टर से शादी करनी है। जब थोड़ी बड़ी हुई तब भी वह ख्वाहिश कम नहीं हुई। वो अपने माता-पिता के साथ एक शादी में सम्मिलित होने दूसरे शहर गई।
वहां उसे वह मिला बड़ा अच्छा सा स्मार्ट सा लड़का था।
उसकी दीदी ने उसका परिचय करवाया बोला यह डॉक्टर है। मेडिकल में पढ़ रहा है।
वह तो उसे देखती ही रह गई ।
उसका दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।
उसको ऐसा लगा जैसे उसका सपनों का राजकुमार यही है।
फिर थोड़ी बहुत जान पहचान भी हुई, कुछ रिश्तेदारी में भी था।
उसके हाव-भाव से ऐसा लग रहा था कि वह उसको पसंद करता है।
और वह लड़की तो उसको मन ही मन प्यार करने लग गई।
अब उठते बैठते सोते जागते सपने भी उसी के देखती।
उसको ऐसा लगता अभी तो मेरी पढ़ाई के थोड़े साल बाकी है।
यह लड़का भी मेरे को प्यार करता ही है ऐसा लगता है तो हमारी शादी हो ही जाएगी।
और उसका निःशब्द प्यार मन में और गहराता गया। उसके मन का प्यार बहुत गहरा होता गया।
दिन रात वह मेडिकल में जाने के और डॉक्टर की पढ़ाई करके डॉक्टर बन के उसके साथ अपनी जिंदगी बिताने के सपने देखने लगी।
समय अपनी गति से चलता रहा भविष्य में कुछ और ही लिखा था। जोड़ियां तो ऊपर से बनकर आती है।
चलते-चलते एक ही बार तो जिंदगी में मिले थे। राहें अलग हो गई।
अब उसके कोई समाचार नहीं कुछ नहीं।
इधर मां-बाप का भी लड़की के ऊपर दबाव बढ़ता जा रहा था समय से शादी कर लो। तुम डॉक्टर से शादी करना चाहती हो हम डॉक्टर ही ढूंढ के देते हैं।
और उसकी डॉक्टर के साथ शादी हो जाती है।
अपनी दुनिया में मस्त हो गई ।
उसका पति भी बहुत ही अच्छा प्यार करने वाला समझदार और होशियार था।
मगर अभी भी वह दिल के एक छोटे से कोने में अपने पहले प्यार को छुपाए बैठी थी ।
उसको मन में ऐसा लग रहा था एक बार मैं उसको देख लूं वह कैसा है।
अब तो बहुत बड़ा आंखों का डॉक्टर बन गया है।
ऐसे ही वे लोग एक दिन मेडिकल कॉन्फ्रेंस में गए थे।
वहां उसका उससे सामना हुआ।
मुलाकात हुई मगर उसके मुंह पर तो अपरिचितता के भाव थे।
उसको याद दिलाने की कोशिश भी करी कि मैं कौन हूं मगर वह तो बिल्कुल भूल ही चुका था।
उसके साथ उसकी सुंदर सी पत्नी थी ।
यह सब देख उस लड़की को लगा मेरा भ्रम था ।
मेरा पहला प्यार
खाली एक आकर्षण था जो एक तरफा था।
वास्तव में मेरा प्यार तो मेरा पति ही है जो मुझे दिलो जान से चाहते हैं।
और उसका भ्रम टूट गया।
अब उसको जिंदगी में कोई भ्रम नहीं था उसका वह भ्रम टूट चुका था।
और उसका वह कोना खाली हो चुका था अब उसके दिल में खाली अपने पति के प्यार के लिए ही जगह थी और उसके पति का प्यार था ।
अब वह पूरे दिलो जान से अपनी जिंदगी में बहुत प्यार और खुशी से रम गई।
भ्रम टूटा तो वास्तविकता से नाता जोड़ा
और प्यार और आकर्षण के बीच का फर्क नजर आया।

