नो एंट्री
नो एंट्री
आज का विषय जो चुना गया है। वह नो एंट्री से शुरू होता है। नो एंट्री से हमें वह मधुर गीत याद आ रहा है।
नो नो नो नो नो नो नो नो नो एंट्री इश्क दी गली विच नो एंट्री।
व्यापार में नो एंट्री गाड़ी की अपनी ही महत्ता है। जिसे नकारा नहीं जा सकता।
बावजूद इसके कुछ अजीबो गरीब घटनाएं किस प्रकार जीवन में घटित हो जाती हैं।
उसे जानने का अवसर हमें इस प्रेरणादायक कहानी में पढ़ने और सुनने को मिलेगा।
जी हां दिल्ली के अंदर गाड़ियों के लिए कुछ विशेष नियम बनाए गए हैं। जिन्हें नो एंट्री के नाम से जाना जाता है। सुबह 11:00 बजे से पहले नो एंट्री रहती है। कहते हैं नो एंट्री होना अत्यंत आवश्यक है। जिससे विद्यालय बच्चे आराम से जा सके। जिससे व्यापार या काम पर लोग आसानी से पहुंच सके।
जहा गाड़ी वाले (ट्रांसपोर्टर) गाड़ी के लिए नो एंट्री का पास बनवा लेते है।
जिसके कारण नो एंट्री में भी गाड़ियों को आसानी से इधर से उधर ले जाया जा सकता है।
हम निर्माण रिटेल होल्डिंग्स के टीम लीडर डी एल ओ ने बाजार में कंपनी की सेल्स प्रमोशन विजिट को ध्यान में रखते हुए नो एंट्री पास प्राप्त गाड़ी की व्यवस्था की थी।
परंतु हमारी सोच और दूरदर्शिता पर बैलगाड़ी रूपी नो एंट्री पास वाली गाड़ी ने पानी फेर दिया।
जहां हमें कंपनी के एस ओ से वाह वाही लूटने का अवसर मिला था।
वही बैलगाड़ी रूपी नो एंट्री मान्यता से प्राप्त गाड़ी ने हमारी सफलता पर इस प्रकार पानी फेर दिया।
जैसे खड़ी फसल पर भयंकर बरसात या ओले का पड़ जाना उसे बर्बाद कर देता है।
हालांकि हम लगातार 8:40 से गाड़ी के मालिक प्रदीप से फोन के माध्यम से गाड़ी को 9:00 या 9:00 बजे से पहले बुलाने का प्रयास कर रहे थे।
प्रदीप ने हमें अपने ड्राइवर का ऐसा नंबर दिया।
जो बार-बार संदेश दे रहा था फोन रिचार्ज ना होने के कारण यह नंबर उपलब्ध नहीं है।
पांच छः बार नंबर मिलाने के पश्चात भी नंबर नहीं लग रहा था। उसके पश्चात हमने कई बार प्रयास किया। परंतु नंबर नहीं लगा।
कुछ समय पश्चात प्रदीप का फोन आया उसके ड्राइवर का दूसरा नंबर यह है।
हमने कहा हमने आपसे पहले ही कहा था। हमें आपकी गाड़ी 9:00 बजे से पहले चाहिए। या 9:00 बजे तक चाहिए।
इस बात को सुनकर गाड़ी के मालिक प्रदीप ने कहा कल से आप गाड़ी जितने बजे कहेंगे। मैं उतने बजे लगा दूंगा। हमने कहा आप क्या बात कर रहे हो। भूख हमें आज लगी है। खाना हम कल खाएंगे। क्या ऐसा संभव है। वह खिलखिला कर हंस दिया। हमने उससे कहा हंसने से हमारा काम आसान नहीं होता।
हमें आपकी नो एंट्री गाड़ी चाहिए ना कि आपकी बैलगाड़ी का हमें इंतजार है।
आप अपने काम के प्रति लापरवाह हो सकते हैं।
परंतु हम अपने काम को सफल बनाने के लिए किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करते।
हम इसी विशेष गुण के कारण कंपनी में सबसे अलग श्रेणी में खड़े नजर आते हैं।
हमें अपने काम में जो बाधा दिखती है। उसे पूर्ण करने के लिए हम स्वयं आगे आ जाते हैं। हम कभी भी किसी के भरोसे नहीं रहते। हमें अपनी काबिलीयत अपनी दूरदर्शिता अपने काम अपने निरंतर प्रयास पर संपूर्ण विश्वास है।
हम टीम वर्क में काम करना पसंद करते हैं। हमें अकेला काम करना बिल्कुल पसंद नहीं।
हमें अकेला रहना पसंद है। परंतु जब बात काम की आती है। तब हमें टीम वर्क में काम करना पसंद है।
आपकी हंसी आपकी लापरवाही दर्शाती है।
आपका ड्राइवर अगर समय पर गाड़ी नहीं दे पा रहा। तो वह उसकी असफलता है। उसकी लापरवाही है। आप उसके लिए पूर्ण रूप से जिम्मेदार है।
क्योंकि आपका यह कर्तव्य बनता है। यदि कोई आप से गाड़ी 9:00 बजे मांग रहा है। तो आप 8 8:15 बजे उस में सीएनजी चेक कर ले पूरी है या नहीं। ना कि आप सीएनजी तब भरवाएंगे जब उसे उस स्थान पर पहुंचना है। जहां उसका कोई इंतजार कर रहा है।
यदि आप ऐसा करते हैं तो सबसे पहले लापरवाह आप हैं। आपको काम करने में कोई रुचि नहीं है। आप यह समझते हैं काम हो जाएगा। इन्हें गाड़ी की आवश्यकता है। चाहे वह आधे घंटे लेट क्यों ना हो। चाहे वह 40 मिनट लेट क्यों ना हो। चाहे वह पोने घंटे लेट क्यों ना हो। आपका काम हो जाएगा कंपनी आपको उसके लिए पैसे देती है।
आप उस काम को गाड़ी देकर फ्री में नहीं कर रहे। आप अपनी गाड़ी के बदले मेहनताना प्राप्त कर रहे हैं। यदि आपको मेहनताना नहीं मिलता। तब आपकी बात को हम रख सकते थे। आप गाड़ी 9:00 नहीं 9:45 बजे आई सब चलता है।
क्युकी आप धर्मार्थ के लिए कार्य कर रहे हैं। अपनी कमाई के लिए नहीं, अपने मुनाफे के लिए नहीं।
परंतु आपको यह भी नहीं मालूम काम की इंपॉर्टेंस क्या है।
जो व्यक्ति जो व्यापारी जो कर्मचारी सफलता प्राप्त करना चाहते हैं। वह अच्छी तरह जानते हैं काम की इंपोर्टेंस उनके लिए क्या है।
परंतु आप जैसे असफल व्यापारी आप जैसे लापरवाह व्यापारी आप जैसे समय की कीमत को ना पहचानने वाले व्यापारी अच्छे साधन होकर भी अच्छी कमाई नहीं कर पाने वाले व्यापारी। हमेशा दुख ही पाते है।
उसका सबसे बड़ा उदाहरण हमारी कंपनी में आपकी गाड़ी का 9:00 बजे कहने के पश्चात भी 9:45 बजे गाड़ी देना लापरवाही है।
यह लापरवाही आपके लिए रोज की बात हो सकती है।
परंतु हमारी कंपनी की विजिट के लिए यह बहुत मायने रखती है।
आपको एक उदाहरण के द्वारा यह समझा देना चाहते हैं। जीवन में अगर तरक्की करनी है। तो उसका मूल मंत्र समय का पाबंद होना ही कहलाता है।
जीवन में सफलता प्राप्त करनी है तो काम को इंपॉर्टेंस देनी ही पड़ती है।
अन्यथा आपके पास नो एंट्री पास वाली गाड़ी के होते हुए भी।
आपकी गाड़ी वहाँ काम नहीं कर पाएगी। जहां उसकी जरूरत पड़ेगी। आपके गाड़ी ठीक उसी प्रकार काम नहीं कर पाएगी।
जिस प्रकार महाभारत में कर्ण के पास सारी शक्तियां होने के पश्चात सही समय पर सही अवसर पर सही मौके पर उसकी शक्तियां उसे सफलता प्राप्त नहीं करा सकी।
आपकी नो एंट्री पास वाली गाड़ी भी हमारे लिए हमारी कंपनी के लिए हमारी कंपनी के सेल्स प्रमोशन के लिए बैलगाड़ी बन कर रह गई।
यह और बात है हमारे कंपनी के एस ओ ने स्वयं से कंपनी सेल्स प्रमोशन की कमान संभालते हुए अन्य गाड़ियों की व्यवस्था कर समय से पहले गोलक धाम और पोस्ट ऑफिस के मार्केट में अन्य साधन के द्वारा पूर्ण रूप से व्यवस्था कर ली।
कंपनी के एस ओ ने जिस प्रकार कंपनी के सेल्स प्रमोशन में टीम वर्क में काम लिया है।
वह प्रशंसनीय ही कहा जाएगा।
कंपनी के एस ओ ने कंपनी के सेल्स प्रमोशन का भार अपने कंधे पर इस प्रकार उठा लिया।
जैसे वीर हनुमान ने संजीवनी बूटी के पर्वत द्रोणागिरी का एक भाग उठा कर लंका ले आए थे।
ठीक उसी प्रकार समय की मांग को देखते हुए कंपनी के एस ओ ने अपनी दूरदर्शिता दिखाते हुए एक सकारात्मक सोच का इस्तेमाल करते हुए कंपनी के सेल्स प्रमोशन को सफल बनाने में संजीवनी बूटी की तरह काम किया है।
कंपनी की इस सेल्स प्रमोशन को देखते हुए हम कंपनी के एस ओ की जितनी भी तारीफ की जाय उतनी कम है।
चलते चलते हम आप जैसे ट्रांसपोर्टरों से यह कहना चाहते हैं। यदि जीवन में सफलता प्राप्त करनी है। यदि जीवन में सफल व्यापारी बनना है। तो समय की कीमत पहचाने।
इतिहास गवाह है आज हमारे बीच में जितने भी उद्योगपति हैं। उन्होंने कभी भी काम में टालमटोल नहीं की। यही कारण है वह भीड़ का हिस्सा नहीं है।
उनका जैसा हर कोई बनना चाहता है। परंतु वह यह भूल जाता है। रातों-रात लक्ष्मी मित्तल नहीं बना जा सकता।
यदि आपको लक्ष्मी मित्तल के जैसा बनना है। तो समय का प्रबंधन आपके लिए रामबाण कहलाएगा।
अन्यथा आपका यह ढीला ढाला रवैया नो एंट्री मान्यता से प्राप्त गाड़ी भी दूसरे के लिए बैलगाड़ी ही साबित होगी।
हम सिर्फ यहां पर यह कहना चाहते हैं। अच्छे साधन यदि आपके पास है। उन साधनों का सही इस्तेमाल करके अपने व्यापार में दिन दुगनी रात चौगुनी तरक्की करो।
अन्यथा एक अच्छा व्यापार होने के बाद भी कुछ समय पश्चात सब कुछ ठप हो जाएगा।
जहां आपको खड़े होने के लिए जीरो से शुरुआत करनी होगी।
अंत में यही कहेंगे व्यापार आपका गाड़ी आपकी समय आपका मर्जी आपकी।
आप जैसा भी निर्णय लें अच्छा या बुरा सफल या असफल।
परंतु कंपनी के एस ओ के बारे में हम टीम लीडर डी एल ओ यही कहना चाहते हैं।
मुद्दई लाख बुरा चाहे तो क्या होता है। वही होता है जो राधे कृष्ण मंजूरे होता है।
कंपनी के एस ओ ने कंपनी के सेल्स प्रमोशन में जो प्रशंसनीय काम किया है। वह साबित करता है जहां चाह वहां राह।
कंपनी के एस ओ ने कंपनी के सेल्स प्रमोशन में अपने काम का जो डंका बजाया है।
वह उन्हें आज नहीं तो कल ऐसा वरदान प्रदान करेगा। जिसे हम और आप सफलता कहते हैं। हो सकता है कंपनी की सेल्स प्रमोशन की यह सफलता।
कंपनी के आला अधिकारी उनमें भावी ए एस एम की झलक देख पा रहे हो।
हम निर्माण रिटेल होल्डिंग्स, मान सिंह नेगी टीम लीडर डी एल ओ नजफगढ़ शाखा के कंपनी के
एस ओ और उनके सेल्स टीम लीडर और सेल्स टीम को कंपनी के सेल्स प्रमोशन को सफल बनाने के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हैं।
हम उम्मीद करते हैं वह आने वाले समय में भी इससे भी बेहतर कंपनी के सेल्स प्रमोशन को सफल बनाएंगे।
हम उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए भी उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हैं।
इतिश्री
